Tuesday, 22 July 2025

complain

श्रीमान Shyamjeet Sir,
नीचे सभी संबंधित विभागों/अधिकारियों को अलग-अलग एप्लिकेशन तैयार कर दी गई हैं। आप इन्हें प्रिंट करके हस्ताक्षर करके संबंधित कार्यालय में जमा कर सकती हैं या डाक से भेज सकती हैं। सभी एप्लिकेशन एक ही विषय और शिकायत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग अधिकारियों को संबोधित हैं।


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📄 1. आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक के लिए आवेदन

सेवा में,
आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक
खरावन सेवईपर,
जनपद – वाराणसी

विषय: गर्भवती महिला को आवश्यक स्वास्थ्य, पोषण एवं दवा सुविधाएं न मिलने की शिकायत।

महोदय/महोदया,
सविनय निवेदन है कि मैं, सरिता देवी, पत्नी श्यामजीत, निवासी खरावन सेवईपर, वर्तमान में 9 माह की गर्भवती हूं। परंतु मुझे अभी तक सरकार द्वारा निर्धारित कोई भी सुविधा जैसे कि गर्भावस्था पंजीकरण, आयरन/कैल्शियम की गोलियाँ, पोषण आहार या जांच/सलाह उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अब डिलीवरी की संभावित तिथि नजदीक है। यदि मुझे या मेरे शिशु को कोई हानि होती है, तो इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्र जिम्मेदार होगा। अतः कृपया तुरंत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

सादर,
सरिता देवी
पति – श्यामजीत
मो. 7408746044
पता – खरावन सेवईपर, वाराणसी
दिनांक – 22/07/2025


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📄 2. CDPO (बाल विकास परियोजना अधिकारी) के लिए आवेदन

सेवा में,
बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO)
[ब्लॉक का नाम],
जनपद – वाराणसी

विषय: गर्भवती महिला को आंगनवाड़ी से स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं न मिलने की शिकायत।

महोदय/महोदया,
मैं सरिता देवी, पत्नी श्यामजीत, निवासी खरावन सेवईपर, 9 माह की गर्भवती हूं, लेकिन मुझे अब तक किसी प्रकार की सुविधा (जैसे आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम, पोषण आहार, जांच इत्यादि) नहीं दी गई है। न तो पंजीकरण हुआ और न ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने कोई संपर्क किया।

आपसे निवेदन है कि इस लापरवाही की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करें और मुझे मेरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

सादर,
सरिता देवी
मो. 7408746044
पता – खरावन सेवईपर, वाराणसी
दिनांक – 22/07/2025


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📄 3. खंड विकास अधिकारी (BDO) के लिए आवेदन

सेवा में,
खंड विकास अधिकारी (BDO)
[ब्लॉक का नाम]
जनपद – वाराणसी

विषय: आंगनवाड़ी केंद्र द्वारा गर्भवती महिला को सुविधाएं न देने के संबंध में शिकायत।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मेरी गर्भावस्था के 9 महीने हो चुके हैं, लेकिन मुझे कोई सरकारी सुविधा नहीं दी गई। यह पूरी तरह से लापरवाही और उपेक्षा है।

आपसे निवेदन है कि संबंधित आंगनवाड़ी की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

प्रार्थिनी,
सरिता देवी
मो. 7408746044
पता – खरावन सेवईपर, वाराणसी
दिनांक – 22/07/2025


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📄 4. CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) वाराणसी के लिए आवेदन

सेवा में,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
वाराणसी, उत्तर प्रदेश

विषय: गर्भवती महिला को चिकित्सा सेवाएं न मिलने की शिकायत।

महोदय,
मैं सरिता देवी, 9 माह की गर्भवती महिला हूं। मुझे स्वास्थ्य विभाग द्वारा न तो कोई जांच, न ही दवा, न पोषण आहार प्रदान किया गया है।

मेरा पंजीकरण भी नहीं हुआ है और न किसी ANM/आशा द्वारा संपर्क किया गया। कृपया मेरी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करें।

प्रार्थिनी,
सरिता देवी
मो. 7408746044
पता – खरावन सेवईपर, वाराणसी
दिनांक – 22/07/2025


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📄 5. ग्राम प्रधान/ग्राम पंचायत सचिव के लिए आवेदन

सेवा में,
ग्राम प्रधान / ग्राम पंचायत सचिव
ग्राम – खरावन सेवईपर
जनपद – वाराणसी

विषय: गांव की गर्भवती महिला को सरकारी सुविधा न मिलने की शिकायत।

महोदय,
मैं सरिता देवी, गर्भवती महिला हूं। मुझे गर्भावस्था की कोई सुविधा जैसे पोषण आहार, दवा, चेकअप आदि नहीं दिया गया है। मैं आपसे निवेदन करती हूं कि इस पर संज्ञान लेकर मेरी मदद की जाए।

प्रार्थिनी,
सरिता देवी
मो. 7408746044
पता – खरावन सेवईपर, वाराणसी
दिनांक – 22/07/2025


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📄 6. ऑनलाइन जनसुनवाई पोर्टल (jansunwai.up.nic.in) हेतु आवेदन फॉर्मेट

शिकायत श्रेणी: महिला एवं बाल विकास / स्वास्थ्य
विषय: गर्भवती महिला को सरकारी सुविधाएं न देने की शिकायत
शिकायत विवरण:

> मैं सरिता देवी, पत्नी श्यामजीत, ग्राम खरावन सेवईपर, वाराणसी की निवासी हूं। मुझे गर्भधारण किए 9 माह हो चुके हैं, लेकिन मुझे सरकार द्वारा दी जाने वाली कोई सुविधा नहीं मिली – जैसे कि पंजीकरण, आयरन-कैल्शियम गोलियां, पोषण आहार, रेडी टू ईट फूड, स्वास्थ्य जांच, आशा/ANM की सलाह आदि।

यह गंभीर लापरवाही है। यदि मेरी या मेरे शिशु की तबीयत बिगड़ती है तो इसके लिए जिम्मेदार संबंधित आंगनवाड़ी, कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक होंगे।

कृपया मेरी शिकायत पर शीघ्र कार्यवाही करते हुए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।




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✅ सुझाव:

आप इन सभी एप्लिकेशनों को एक ही दिन में जमा करें और एक कॉपी पर "रसीद" (Receival Stamp/हस्ताक्षर) लेकर रखें।
अगर आप चाहें तो मैं इन सभी एप्लिकेशन को एक PDF में बनाकर देने के लिए तैयार हूं।

क्या आपको यह सब PDF में चाहिए या प्रिंट करने योग्य Word file में?

Monday, 21 July 2025

ai

बिलकुल Shyamjeet Sir! नीचे आपको AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े कुछ रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य पूरी तरह हिंदी में दिए जा रहे हैं। ये आप अपनी वीडियो, क्लास या ब्लॉग में उपयोग कर सकते हैं:


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🔥 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के 15 दमदार तथ्य – हिंदी में

1. AI की शुरुआत 1956 में हुई थी
➤ “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” शब्द सबसे पहले John McCarthy ने इस्तेमाल किया था।


2. AI आज इंसानों जैसा सोच सकता है
➤ मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग की वजह से अब AI खुद से निर्णय लेने लगा है।


3. Google, Facebook और YouTube पर जो दिखता है वो AI तय करता है
➤ आपके सर्च और व्यवहार के अनुसार AI वीडियो, पोस्ट और ऐड दिखाता है।


4. AI खुद से सीख सकता है
➤ Self Learning AI अब कोडिंग और निर्णय खुद से सीखने में सक्षम है।


5. AI आपकी आवाज़ को पहचानता है
➤ Siri, Alexa और Google Assistant जैसे वॉइस असिस्टेंट इसी का हिस्सा हैं।


6. AI चेहरे को भी पहचान लेता है
➤ फेस अनलॉक, CCTV पहचान प्रणाली में AI का प्रयोग हो रहा है।


7. AI अब डॉक्टर की तरह बीमारी की पहचान कर रहा है
➤ कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों को AI अब जल्दी और सही पकड़ सकता है।


8. AI अब गाने, कविता और चित्र भी बना रहा है
➤ जैसे ChatGPT लेख लिखता है, वैसे ही Midjourney चित्र और Suno AI गाने बनाता है।


9. AI अब नौकरियों का चयन भी करता है
➤ कंपनियों में रिज़्यूमे स्कैन करना, सही कैंडिडेट चुनना – ये सब AI से हो रहा है।


10. AI अपराध की भविष्यवाणी कर सकता है
➤ कई देश AI की मदद से यह तय करते हैं कि कहाँ अपराध की संभावना अधिक है।


11. AI बिना ड्राइवर के गाड़ी चला सकता है
➤ Tesla, Waymo जैसी कंपनियाँ सेल्फ-ड्राइविंग कार बना रही हैं।


12. AI ने वर्ल्ड चेस चैंपियन को हरा दिया था
➤ 1997 में IBM के AI “Deep Blue” ने ग्रैंडमास्टर गैरी कास्परोव को हरा दिया था।


13. AI से लाखों नौकरियाँ खत्म हो सकती हैं
➤ लेकिन इसके साथ-साथ नई नौकरियाँ भी बनेंगी, जैसे – AI ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट आदि।


14. AI का बाजार अरबों डॉलर का हो चुका है
➤ अनुमान है कि 2030 तक AI का वैश्विक कारोबार ₹120 लाख करोड़ से ज़्यादा होगा।


15. AI अब भावनाओं को भी समझ सकता है
➤ "Emotional AI" अब चेहरे के भाव, आवाज़ के लहजे से आपके मूड को पहचानता है।




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✅ अगर आप चाहें तो:

इन तथ्यों पर आधारित वीडियो स्क्रिप्ट,

YouTube Shorts के लिए स्क्रिप्ट,

या PowerPoint प्रेजेंटेशन भी मैं बना सकता हूँ।


बोलिए, किस फॉर्म में चाहिए?
और क्या एक दमदार थंबनेल बनाने का AI prompt भी चाहिए?

🙏

Wednesday, 16 July 2025

barish

Bilkul Shyamjeet Sir! Aapka subject seasonal awareness + safety par based hai, jo monsoon, agriculture, aur Kawar Yatra jaise local situations se juda hua hai. Aise topic par video banana logon ke liye informative aur life-saving ho sakta hai. Neeche main aapke liye ek Hindi video script likh raha hoon jo emotional bhi hai, informative bhi, aur aam logon ko directly address karta hai.


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🎬 Title Suggestion (YouTube):

"⚡बारिश में करें ये 7 काम, नहीं तो जा सकती है जान | सावन सुरक्षा Tips | Kawar Yatra + खेत + बिजली"


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🎤 Video Script (Hindi – Monsoon Safety Special)

(Background music – slow emotional + light rain sound)


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[Intro Hook – 0:00 to 0:15]
🎙️
"सावन का महीना है...
कहीं खेतों में धान रोपे जा रहे हैं,
कहीं कांवड़िए 'बोल बम' के जयकारे के साथ सड़कों पर हैं,
और ऊपर से रुक-रुक कर बरसती बिजली-बारिश...
लेकिन जरा सी लापरवाही, जिंदगी पर भारी पड़ सकती है..."


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[Main Body – 0:15 to 2:30]

🎙️
"नमस्कार दोस्तों,
आज का वीडियो बहुत जरूरी है — खासकर गांव के लोगों, किसानों, और कांवड़ यात्रियों के लिए।

🌧️ 1. बारिश में बिजली के खंभों और तारों से दूर रहें
– गीले हाथों से बिजली का कोई भी सामान न छुएं।
– खेतों में लगे मोटर या तारों को सिर्फ सूखे कपड़े और चप्पल पहनकर ही ऑन करें।
– अगर बिजली का तार जमीन पर गिरा दिखे – बिलकुल भी पास न जाएं, तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें।

🌾 2. खेत में काम करते समय सावधानियां
– बारिश हो रही हो तो धान लगाने का काम रोक दें।
– गीली मिट्टी में अक्सर करंट फैल सकता है अगर पास में कोई टूटा तार हो।
– खेत में मोटर चलाते वक्त सूखे बांस या लकड़ी से स्विच करें।

🛣️ 3. कांवड़ यात्रियों के लिए खास सलाह
– भीड़ में बिजली के तारों या झूलते लाइटों से सावधान रहें।
– बारिश में भींग कर हाई वोल्टेज स्पीकर या जनरेटर को हाथ न लगाएं।
– जहां-जहां यात्रा कर रहे हों, वहां सड़क के किनारे खड़े बिजली के खंभों से दूरी बनाएं।

🌩️ 4. तेज बिजली चमकते समय क्या करें?
– खुले मैदान, तालाब, पेड़ के नीचे खड़े न हों।
– अगर बाइक पर हों, तो रुक कर किसी पक्के शेड में रुक जाएं।
– मोबाइल और मेटल चीजें हाथ में न रखें।

🏠 5. घर में करें ये काम
– घर के प्लग से टीवी, फ्रिज, इंटरनेट निकाल लें जब तेज बिजली चमके।
– ज्यादा बारिश हो रही हो तो छत या टीन पर चढ़ने की गलती न करें।
– बच्चों को अकेले बारिश में बाहर न भेजें।

🧍 6. चप्पल-जूते पहनना जरूरी है
– खेत में या यात्रा में नंगे पांव चलना बहुत खतरनाक है।
– गीली जमीन पर करंट का खतरा बढ़ जाता है।

🗣️ 7. हर गांव में चलाएं जागरूकता
– अपने गांव में दूसरों को भी बताएं ये बातें।
– पंचायत या स्कूल के माध्यम से लोगों को सावधानी सिखाएं।


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[Outro – 2:30 to 3:00]

🎙️
"दोस्तों, सावन का महीना भक्ति और खेती दोनों के लिए बहुत खास होता है,
लेकिन आपकी एक छोटी सी लापरवाही
आपके पूरे परिवार को अंधेरे में छोड़ सकती है।

इसलिए... ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ को याद रखिए।

अगर ये वीडियो आपको ज़रूरी लगा —
तो इसे अपने गांव के व्हाट्सएप ग्रुप, पंचायत और स्कूल तक जरूर पहुँचाएं।
आपका एक शेयर किसी की जान बचा सकता है!"_

🙏 "धन्यवाद, जय बम भोले! जय किसान!" 🚜⚡🕉️


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✅ Bonus Tips (for Screen)

हर पॉइंट पर icon या emoji या animation दिखाएं

बिजली गिरने का fake animation और sound effect डालें

खेत या कांवड़ यात्रा का local footage यूज़ करें (free stock use or record)

End screen पर “Share Karein” या “Bachao Apne Gaon Ko” का emotional appeal



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Agar aap chahein to mai iske liye background music suggestion, cinematic thumbnail prompt, ya even voice-over style bhi de sakta hoon.

Batayein, aapko agla step kya chahiye?


Tuesday, 15 July 2025

TALLY PRIME 2025 ENGLISH

Introduction to Tally Prime (परिचय)

Tally Prime is a business management software designed to simplify accounting, inventory, and taxation processes for small and medium enterprises (SMEs). It is user-friendly and helps in managing financial and operational tasks efficiently.

Tally Prime एक व्यवसाय प्रबंधन सॉफ़्टवेयर है, जो छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए अकाउंटिंग, इन्वेंट्री और टैक्सेशन प्रक्रियाओं को सरल बनाता है। यह उपयोगकर्ता के अनुकूल है और वित्तीय और परिचालन कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करता है।


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How to Create a New Company in Tally Prime

Tally Prime में नई कंपनी कैसे बनाएं

Steps (चरण):

1. Open Tally Prime (Tally Prime खोलें):

Launch the Tally Prime application.

On the home screen, click on "Create Company".

टैली प्राइम एप्लिकेशन खोलें।

होम स्क्रीन पर "Create Company" पर क्लिक करें।



2. Enter Basic Details (बुनियादी विवरण दर्ज करें):

Company Name (कंपनी का नाम): Enter the name of your company.

Mailing Address (डाक पता): Enter the communication address.

State & Country (राज्य और देश): Select the appropriate options.

Pin Code (पिन कोड): Provide the location's pin code.



3. Set Financial Year (वित्तीय वर्ष सेट करें):

Enter the start date of the financial year (e.g., 01-04-2024).

Provide the books beginning date.



4. Enable Features (सुविधाएं सक्षम करें):

Enable GST, TDS, or other features as per business requirements.



5. Save Company (कंपनी सेव करें):

Press Ctrl + A to save the company details.

Tally Prime Notes (Step-by-Step Guide)

Tally Prime स्टेप-बाय-स्टेप नोट्स
How to Create a Group in Tally Prime (Step-by-Step Guide with Definition)

Tally Prime में ग्रुप कैसे बनाएं (परिभाषा के साथ स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)


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What is a Group in Tally Prime? (ग्रुप क्या है?)

In Tally Prime, a Group is a classification of ledger accounts that helps in organizing and summarizing financial transactions. Groups categorize ledgers based on their nature (assets, liabilities, income, or expenses). For example, "Sundry Debtors" is a group under which customer accounts are maintained.

Tally Prime में ग्रुप लेजर खातों का वर्गीकरण है, जो वित्तीय लेन-देन को व्यवस्थित और संक्षेपित करने में मदद करता है। ग्रुप्स लेजर्स को उनकी प्रकृति (संपत्ति, देनदारी, आय, या व्यय) के आधार पर वर्गीकृत करते हैं। उदाहरण के लिए, "संड्री डेब्टर्स" एक ग्रुप है जिसके अंतर्गत ग्राहक खाते बनाए जाते हैं।


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Steps to Create a Group in Tally Prime

Tally Prime में ग्रुप बनाने के चरण


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Step 1: Open the Create Group Option

1. Go to Gateway of Tally

From the home screen, select Masters.

Choose Create > Group.


गेटवे ऑफ टैली पर जाएं

होम स्क्रीन से Masters चुनें।

Create > Group विकल्प का चयन करें।





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Step 2: Enter Group Name

Enter the Name of the group (e.g., "Loan Accounts").


ग्रुप का नाम दर्ज करें

ग्रुप का नाम दर्ज करें (जैसे, "Loan Accounts")।



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Step 3: Select Parent Group

In the Under field, select the parent group to which this group belongs.

For example: If you are creating "Loan Accounts," select "Liabilities" as the parent group.



पैरेंट ग्रुप चुनें

Under फ़ील्ड में उस पैरेंट ग्रुप को चुनें जिससे यह ग्रुप संबंधित है।

उदाहरण: यदि आप "Loan Accounts" बना रहे हैं, तो "Liabilities" को पैरेंट ग्रुप के रूप में चुनें।




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Step 4: Specify Other Details (Optional)

Nature of Group: Define whether the group is for Revenue, Expenses, Assets, or Liabilities.

Does it affect Gross Profit?: Specify "Yes" or "No" based on the group’s impact on gross profit.


अन्य विवरण निर्दिष्ट करें (वैकल्पिक)

ग्रुप की प्रकृति: यह परिभाषित करें कि ग्रुप राजस्व, व्यय, संपत्ति, या देनदारी के लिए है।

क्या यह सकल लाभ को प्रभावित करता है?: "Yes" या "No" का चयन करें।



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Step 5: Save the Group

Press Ctrl + A to save the group details.


ग्रुप सेव करें

Ctrl + A दबाकर ग्रुप विवरण को सेव करें।


List of 28 Groups in Tally Prime with Definitions (सरल परिभाषा के साथ 28 ग्रुप्स की सूची)

1. Capital Account (पूंजी खाता)

English: Owner's investment or retained earnings in the business.

Hindi: व्यवसाय में मालिक द्वारा लगाया गया धन या लाभ।
Example: Capital, Reserves.
उदाहरण: पूंजी, आरक्षित निधि।


2. Reserves & Surplus (रिज़र्व और अधिशेष)

English: Accumulated profits saved for future use.

Hindi: व्यवसाय का बचा हुआ लाभ।
Example: General Reserve.
उदाहरण: सामान्य रिज़र्व।


3. Current Assets (चल संपत्ति)

English: Assets that can be converted into cash quickly.

Hindi: ऐसी संपत्ति जो जल्दी नकदी में बदली जा सकती है।
Example: Cash, Bank Balance.
उदाहरण: नकद, बैंक बैलेंस।


4. Fixed Assets (स्थिर संपत्ति)

English: Long-term assets used in business operations.

Hindi: लंबे समय तक उपयोग में आने वाली संपत्ति।
Example: Land, Buildings.
उदाहरण: भूमि, भवन।


5. Investments (निवेश)

English: Money invested for earning profits.

Hindi: लाभ कमाने के लिए किए गए निवेश।
Example: Shares, Mutual Funds.
उदाहरण: शेयर, म्यूचुअल फंड।


6. Loans (Liability) (ऋण - देनदारी)

English: Borrowings by the business.

Hindi: व्यवसाय द्वारा लिया गया उधार।
Example: Bank Loan.
उदाहरण: बैंक ऋण।


7. Current Liabilities (वर्तमान देनदारी)

English: Liabilities that are payable within a short period.

Hindi: जल्दी चुकाने वाली देनदारियां।
Example: Creditors.
उदाहरण: क्रेडिटर्स।


8. Duties & Taxes (शुल्क और कर)

English: Taxes payable to the government.

Hindi: सरकार को चुकाए जाने वाले कर।
Example: GST, TDS.
उदाहरण: जीएसटी, टीडीएस।


9. Provisions (प्रावधान)

English: Money kept aside for future expenses.

Hindi: भविष्य के खर्चों के लिए सुरक्षित धन।
Example: Tax Provisions.
उदाहरण: कर प्रावधान।


10. Sundry Debtors (संड्री डेब्टर्स)

English: Customers who owe money to the business.

Hindi: व्यवसाय के ग्राहक जिन्होंने उधार पर सामान खरीदा।
Example: Customer Accounts.
उदाहरण: ग्राहक खाते।


11. Sundry Creditors (संड्री क्रेडिटर्स)

English: Suppliers to whom the business owes money.

Hindi: व्यवसाय के सप्लायर जिनसे उधार पर सामान खरीदा।
Example: Supplier Accounts.
उदाहरण: सप्लायर खाते।


12. Sales Account (बिक्री खाता)

English: Total revenue earned through sales.

Hindi: व्यवसाय से होने वाली कुल बिक्री।
Example: Domestic Sales.
उदाहरण: घरेलू बिक्री।


13. Purchase Account (खरीद खाता)

English: Expenses incurred on buying goods.

Hindi: व्यवसाय द्वारा खरीदा गया सामान।
Example: Raw Material Purchase.
उदाहरण: कच्चा माल खरीद।


14. Direct Income (प्रत्यक्ष आय)

English: Income from primary business activities.

Hindi: व्यवसाय की मुख्य गतिविधियों से हुई आय।
Example: Service Fees.
उदाहरण: सेवा शुल्क।


15. Indirect Income (अप्रत्यक्ष आय)

English: Income from secondary activities.

Hindi: अन्य माध्यमों से हुई आय।
Example: Rent, Interest.
उदाहरण: किराया, ब्याज।


16. Direct Expenses (प्रत्यक्ष व्यय)

English: Expenses directly related to production or sales.

Hindi: उत्पादन या बिक्री से सीधे जुड़े खर्च।
Example: Raw Material, Wages.
उदाहरण: कच्चा माल, मजदूरी।


17. Indirect Expenses (अप्रत्यक्ष व्यय)

English: General business expenses.

Hindi: अन्य खर्च जो सीधे उत्पादन से नहीं जुड़े।
Example: Electricity, Salary.
उदाहरण: बिजली, वेतन।


18. Bank Accounts (बैंक खाते)

English: Bank accounts used by the business.

Hindi: व्यवसाय के बैंक खाते।
Example: SBI Current Account.
उदाहरण: एसबीआई करंट अकाउंट।


19. Cash-in-Hand (नकद)

English: Cash available with the business.

Hindi: व्यवसाय के पास उपलब्ध नकदी।
Example: Petty Cash.
उदाहरण: पेटी कैश।


20. Branch/Divisions (शाखा/विभाग)

English: Different branches or divisions of the business.

Hindi: व्यवसाय की विभिन्न शाखाएं या विभाग।
Example: Delhi Branch.
उदाहरण: दिल्ली शाखा।


21. Miscellaneous Expenses (अन्य खर्च)

English: Small or insignificant expenses.

Hindi: ऐसे खर्च जो महत्वपूर्ण नहीं हैं।
Example: Minor Expenses.
उदाहरण: छोटे खर्चे।


22. Suspense Account (सस्पेंस खाता)

English: Temporary account for unclear transactions.

Hindi: अस्थायी रूप से रिकॉर्ड किए गए लेन-देन।
Example: Uncertain Transactions.
उदाहरण: अनिश्चित लेन-देन।


23. Profit & Loss Account (लाभ और हानि खाता)

English: Account showing total profit or loss.

Hindi: व्यवसाय के कुल लाभ या हानि को दर्शाता है।
Example: Net Profit.
उदाहरण: कुल लाभ।


24. Loans & Advances (Asset) (ऋण और अग्रिम - संपत्ति)

English: Loans given by the business.

Hindi: व्यवसाय द्वारा दूसरों को दिया गया उधार।
Example: Employee Loan.
उदाहरण: कर्मचारी ऋण।


25. Secured Loans (सुरक्षित ऋण)

English: Loans taken against collateral.

Hindi: वह ऋण जो किसी संपत्ति के गारंटी पर लिया गया है।
Example: Mortgage Loan.
उदाहरण: बंधक ऋण।


26. Unsecured Loans (असुरक्षित ऋण)

English: Loans without any collateral.

Hindi: ऐसा ऋण जो बिना गारंटी के लिया गया है।
Example: Personal Loan.
उदाहरण: निजी ऋण।


27. Stock-in-Hand (स्टॉक)

English: Inventory available with the business.

Hindi: व्यवसाय के पास उपलब्ध स्टॉक।
Example: Finished Goods.
उदाहरण: तैयार माल।


28. Capital Work-in-Progress (पूंजीगत कार्य प्रगति में)

English: Assets under construction.

Hindi: निर्माणाधीन संपत्तियां।
Example: Building under construction.
उदाहरण: निर्माणाधीन भवन।
Tally Prime में Ledger कैसे बनाएं? (How to Create a Ledger in Tally Prime)

Ledger की परिभाषा (Definition of Ledger):

English: A ledger is an individual account used to record transactions related to a specific party, expense, income, asset, or liability.

Hindi: लेजर एक व्यक्तिगत खाता है, जिसमें किसी विशेष पार्टी, खर्च, आय, संपत्ति, या देनदारी से संबंधित लेन-देन का रिकॉर्ड होता है।


Tally Prime में हर लेन-देन के लिए लेजर बनाना आवश्यक होता है। नीचे Step-by-Step प्रक्रिया दी गई है।


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Steps to Create a Ledger (लेजर बनाने के चरण)


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Step 1: Open Ledger Creation Screen (लेजर क्रिएशन स्क्रीन खोलें)

English:

1. Go to Gateway of Tally > Create > Ledger.


2. Alternatively, press Alt + C from any screen where ledger is required.



Hindi:

1. Gateway of Tally > Create > Ledger पर जाएं।


2. या, जहां लेजर की आवश्यकता हो, वहां से Alt + C दबाएं।





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Step 2: Enter Ledger Name (लेजर का नाम दर्ज करें)

English: Enter the name of the ledger (e.g., "Rent Expense").

Hindi: लेजर का नाम लिखें (जैसे, "किराया व्यय")।



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Step 3: Select Group (ग्रुप चुनें)

English:

In the Under field, choose the relevant group for the ledger.

Example:

For expenses, choose Indirect Expenses.

For income, choose Indirect Income.



Hindi:

Under फ़ील्ड में उस ग्रुप का चयन करें जिससे लेजर संबंधित है।

उदाहरण:

खर्च के लिए Indirect Expenses चुनें।

आय के लिए Indirect Income चुनें।





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Step 4: Provide Additional Details (अतिरिक्त विवरण भरें)

1. Maintain Balances Bill-by-Bill (Optional):

English: Set this to Yes for Sundry Debtors or Creditors to track invoices.

Hindi: यदि लेजर Sundry Debtors या Creditors के लिए है, तो इसे Yes करें।



2. Inventory Values are Affected (Optional):

English: Set to Yes if the ledger is linked to inventory.

Hindi: यदि लेजर इन्वेंट्री से जुड़ा है, तो इसे Yes करें।



3. Tax Details (कर विवरण):

English: If the ledger is GST applicable, enter GST details.

Hindi: यदि लेजर पर GST लागू है, तो GST विवरण भरें।





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Step 5: Save the Ledger (लेजर सेव करें)

English: Press Ctrl + A to save the ledger.

Hindi: Ctrl + A दबाकर लेजर सेव करें।



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Accounting

Accounting 

Account and account book :-
 
Accounting लेनदेन या लाभ हानि जैसे Record  के लेखे जोखे को Account  कहते हैं  |
Bank  में यदि हमारा Account  है तो अवश्य ही हम जानते हैं कि जो पैसा हम जमा करते हैं उसे हमारी Passbook  में Credit  (cr) धनी के खाने में और जो पैसा हम निकालते हैं उसे हमारी Passbook  में Debit  खाने में लिखा जाता है (dr) मैं से Debit  घटा देने पर जो शेष रह जाता है उसे Balance  के खाने में लिखा जाता है लेखा जोखा रखते समय केवल नगद राशि का ही विवरण नहीं  रखना होता बल्कि उस माल का भी विवरण रखना होता है जिसके कारण रकम खर्च की जाती है गोदाम में कौन सा सामान कितनी मात्रा में है इसका विवरण भी Account  का एक हिस्सा है प्रत्येक प्रकार के लेखा-जोखा का एक प्रारूप होता है जिसके निर्धारित खानों में निश्चित रखे जाते हैं इस प्रकार के प्रत्येक Account  को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है 

Account and journals 

रोजनांचा अंग्रेजी में जनरल कहलाता है जनरल शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के जन्म शब्द से हुई है इसका शाब्दिक अर्थ दिन होता है दोहरी लेखा प्रणाली में समाप्त व्यापारिक लेनदेन को तिथि या दिनांक के क्रम में लिखा जाता है उसे रोजगार कहते हैं रोजगार में लेनदेन में लिखने का कार्य जनरलिंग कहलाता है रोजाना में लेनदेन में लिखने का कार्य जनरल लिंग कहलाता है रोजाना क्यों में समाप्त पांच खाने होते हैं जिसमें बाई से दाएं और कम से दिनांक विवरण खाता पृष्ठ संख्या डेबिट और क्रेडिट होता है इसका प्रारूप कुछ इस प्रकार है रुणिचा क्योंकि एक पूरे दिन का लेखा-जोखा रखता है इसलिए इसे हम द बुक भी कहते हैं दूसरे शब्दों में जनरल या द बुक के शब्दों में हम निम्न निष्कर्ष निकाल सकते हैं

    Account Maintain  करने के प्रमुख लाभ निम्न प्रकार है  - 

    1 .  भूल से बचाव 
    2.   व्यापार की आर्थिक स्थिति की जानकारी
    3 .  ऋण वसूली से सहायता 
    4.   तुलनात्मक विश्लेषण में सहायता

         1. भूल से बचाव :-  
                                        व्यापार के समस्त लेनदेन को मौखिक याद रखना संभव नहीं है Account  द्वारा लेनदेन को संपूर्ण विवरण के साथ लेकर रखना जाता है जिसको किसी भी समय देख कर हम अपने भूले बिसरे लेन-देन का पता लगा सकता है |          
                         
         2. व्यापार की आर्थिक स्थिति की जानकारी :-
                                          हमारी नीतियां हमारे व्यापार को लाभ पहुंचा रहे हैं या हानि और यह लाभ या हानि कितनी है इसे जानने के लिए Account  की आवश्यकता होती है हमारे पास कितना धन  संपत्ति है और हम कितने के देनदार हैं यह सब बातें Account  देख कर हम पता लगा सकते हैं |                  
        3. ऋण वसूली में सहायता :-  
                                            व्यापार में कई बार ऐसी स्थिति होती है कि किसी से अपनी रकम वसूल करने के लिए कानूनी सहायता भी लेनी पड़ती है न्यायालय में ऐसी स्थिति में हमारी Account  सबूत का काम करते जो की विधि द्वारा माने हैं |
                                            
        4.  तुलनात्मक विश्लेषण में सहायता :-  
                                            पिछले वर्ष या महीनों में अपने व्यापार के उतार - चढ़ाव का अध्ययन एवं उनके कार्यों का विश्लेषण करने में Account  की आवश्यकता होती है.                  

    दोहरी लेखा प्रणाली(Double Entry System)  :-     
                                           दोहरा लेखा प्रणाली Account  आयामी प्रणाली है जिससे प्रत्येक उद्देश्यों का पूर्ति की जाती है इस प्रणाली का विकास 1494 ईस्वी में वेनिस नगर में लूकस पैसिओली  किया था दोहरा लेखा प्रणाली का अभिप्राय प्रत्येक व्यवसाय लेनदेन को अलग-अलग व्यापारिक पुस्तिकाओं में दो स्थानों पर लिखने में है इस प्रकार लिखे Account  में किसी एक जगह मूल भूल चूक हो जाने पर दूसरे Record  के आधार पर गलती को आसान से ढूंढ लेते हैं और उसे ठीक कर लिया जाता है.                                              

    प्रारंभिक लेखा बहिया और रोजनामचा :-
                                             वह पुस्तिका जिसमें Account  लिखा जाता है खाता  कहलाती है बहिया  अनेकों प्रकार की होती हैं जिनमें रोजनामचा (Journal)  प्रथम एवं प्रमुख है |       

    रोजनामचा (Journal ) :-
                                                            रोजनामचा अंग्रेजी में Journal कहलाता है Journal शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के Journ शब्द से हुई है इसका शाब्दिक अर्थ दिन होता है दोहरी लेखा प्रणाली में समाप्त व्यापारिक लेनदेन को तिथि या दिनांक के क्रम में लिखा जाता है उसे रोजनामचा कहते हैं रोजनामचे  में लेनदेन में लिखने का कार्य Journaling कहलाता है रोजनामचे में लेनदेन के लिखने का कार्य Journaling कहलाता है रोजनामचे में सामान्यतः पांच खाने होते हैं जिसमें बाई से दाएं और क्रमशः दिनांक, विवरण, खाता, पृष्ठ संख्या, डेबिट और क्रेडिट होता है इसका प्रारूप इस प्रकार है


Date

Particular

L.P.N.

Debit

Credit



रोजनामचा क्योंकि यह पूरे दिन का लेखा-जोखा रखता है इसलिए इसे हम Day Book भी कहते हैं दूसरे शब्दों में Journal या Day Book के शब्दों में हम निम्न निष्कर्ष निकाल सकते हैं

    1.    रोजनामचे या  Day Book अकाउंट की एक प्रारंभिक पुस्तिका है |
    2.    रोजनामचे में दिनांक के क्रम में लेखा-जोखा रखते हैं |
    3.    Book Keeping  में यह पुस्तिका Diary का भी काम करती है |

    रोजनामचे की उपयोगिता :- 
                रोजनामचे  हमारे लिए किस तरह उपयोगी है यह समझने के लिए उसकी विशेषता को तीन     श्रेणी में बांटा गया है

    1. ढूंढने में आसानी :-  
                                       रोजनामचे में एक प्रत्येक व्यापारिक लेनदेन को तथा लेखा - जोखा दिनांक की क्रम में रखा जाता है इस कारण किसी लेनदेन या लेखे - जोखे का जानकारी आसानी से प्राप्त कर लिया जाता है जिसका दिनांक मालूम हो

    2. खतौनी में आसानी : - 
                                        रोजनामचे की सहायता से संबंधित खानों में खतौनी सरल हो जाती है और किसी खाते में खतौनी ढूंढने की संभावना नहीं रहती है

    3. शाखा में सुविधा :- 
                                       प्रत्येक रोजनांचे में शाखा लिखी जाती है जिसमें कोई रोजनामचे के शुद्धता की जांच की जा सकती है

        खाते के प्रकार ( Types of Accounts ) :-


   खाता मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है -
                       
    1. Personal Account ( व्यक्तिगत खाता )                
    2. Real Account ( वास्तविक खाता )     
    3. Nominal Account ( वास्तविक खाता  )                       
   
    1. Personal Account ( व्यक्तिगत खाता) :-
                                              Personal Account  के अंतर्गत किसी विशेष या किसी Factory  या Company  का खाता आता है जैसे - Ram Account , Shubham Account , S.K.T Account etc.                        , 
       *  नियम ( Rule ) :-
                                            जो वस्तु हमारे पास आती है वह  Debit  और जो वस्तु हमारे पास से जाती है वह Credit  होती है |
                                          
        2. Real Account ( वास्तविक खाता ) :- 
                                             वह खाते जिनमें वस्तुओं एवं संपत्तियों के क्रय विक्रय का लेखा-जोखा रखा जाता है Real Account कहलाता है जैसे Sale A/C  , Purchase A/C  , Cash A/C  ,Building A/C Machine A/C etc. 
                     
    * नियम ( Rule ):- 
                                                इस खाते में यदि कोई वस्तु आती है तो उसके राशि को Debit  में रखते हैं और यदि कोई वस्तु जाती है तो उसकी राशि को Credit  में रखते हैं.        
            
3. Nominal A/C ( अवास्तविक खाता ) :-
                                                                                     वह खाते जो व्यापार के आय-व्यय अथवा लाभ हानि से संभव रखते हैं Nominal A/C कहते हैं , जैसे - Salary A/C , Wage A/C, Commission A/C,  etc.    

      * नियम ( Rule ):- 
                                                    इस खाते में खर्च अथवा हानि को डेबिट खाते में लिखते हैं और लाभ व आय को क्रेडिट खाते में लिखते हैं

       
    प्रारंभिक Account Bank  और बही :-    
                                                प्रारंभिक A/C  को केवल रोजनामचा में ही नहीं लिखते हैं बल्कि अन्य सहायक उसको में लिखते हैं यह पुस्तकें वि की संख्या के अनुसार कमियां अधिक हो सकती है साधारण Account को लिखने के लिए निम्न प्रकार के साए पुस्तिकाओं का प्रयोग किया जाता है |                        
 1. Cash book  :-  
                         सहायक हियों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण वही Cash Book  होती है |
                    
2. Purchase book :-
                                       Purchase Book में उधार खरीदे गए माल का लेखा-जोखा रखा जाता है इसमें किसी तरह की माल एवं संपत्तियों को नहीं लिखा जाता है |       
                                          
3. Sale book :-
                                 सिर्फ अपने उधार भी चीजें माल का लेखा-जोखा रखा जाता है |                                
 4. Purchase Return Book :- 
                            क्रय किए गए माल की वापसी का लेखा-जोखा रखने के लिए इस वही का प्रयोग करते हैं |
                  
5. Sale Return Book :-
                             विक्रय किए गए माल की वापसी का लेखा-जोखा रखने के लिए इस वही का प्रयोग करते हैं |

                    Questions:- 

   1. नगद पूंजी से व्यापार आरंभ किया         10000
    2. नगद मशीन खरीदी                              5000
    3. मोहन बजाज को भुगतान किया           7000
    4. मजदूरी चुकाया                                     850
    5. विनय सरगम से प्राप्त किया                 1500
    6. S. K. ट्रेडर्स को उधार माल बेचा           2500
    7. ताराचंद्र से नगर माल खरीदा                8000
    8. प्रवीण से रोकड़ प्राप्त हुए                     8500
    9. वेतन दिया                                            15000
    10. नगद रोकड़ से व्यापार आरंभ किया   50000
    11. माल खरीदा                                        7500
    12. फर्नीचर खरीदा                                    2500
    13. बिल्डिंग खरीदा                                    125000
    14. कार्यालय के व्ययों का भुगतान किया   1250
    15. किराया दिया                                        4500
    16. राम से नगद मॉल क्रय किया                 3500
    17. कमीशन मिला                                        550
    18. बैंक में जमा किया                                   13000
    19. बैंक से निकला                                        25500
    20. रोकड़ बही से व्यापार आरंभ किया        135000

Solution :-

Date

Particular

L. P. N.

Dr.

Cr.

1.

Cash A/c

       Capital A/c

100000

100000

2.

Machine A/c

      Cash A/c

5000

5000

3.

Mohan Bajaj A/c

       Cash A/c

7000

7000

4.

Wages A/c

      Cash A/c

850

850

5.

Cash A/c

       Vinay Sargam A/c

1500

1500

6.

S.K Traders A/c

       Sale A/c

2500

2500

7.

Purchase A/c

        Cash A/c

8000

8000

8.

 Cash A/c

        Praveen A/c

8500

8500

9.

Salary A/c

         Cash A/c

15000

15000

10.

Cash A/c

      Capital A/c

50000

50000

11.

Purchase A/c

         Cash A/c

7500

7500

12.

Furniture A/c

         Cash A/c

2500

2500

13.

Building A/c

         Cash A/c

125000

125000

14.

Office A/c

       Cash A/c

1250

1250

15.

Rent A/c

       Cash A/c

4500

4500

16.

Purchase A/c

         Cash A/c

3500

3500

17.

Cash A/c

       Commission  A/c

550

550

18.

Bank A/c  

      Cash A/c

13000

13000

19.

Cash A/c

      Bank A/c

25500

25500

20.

Cash A/c

       Capital A/c

135000

135000


 Receive bill book :-
                             व्यापारियों द्वारा समय-समय पर अपने देनदारों से विनिमय bill प्रतीक्षा पत्र एवं Check  आदि प्राप्त करते हैं इस तरह की Entry  इस book में रखते हैं  |
                                    
Pay Bill Book :- 
                            व्यापारी अपने लेनदार  को समय-समय पर जो भुगतान करते है इसका लेखा-जोखा इस Book  में रखते हैं |     
          
Proper Formal Book :-
                                 इस बही में विशिष्ट प्रकार के लेखों के अन्य प्रकार के लेनदाराे  का विवरण रखा जाता है                 
       
Other Subsidiary :- 
                        उपरोक्त  बही के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न व्यवसाय के अनुसार निम्न प्रकार की सहायक पुस्तकें भी प्रयोग में लाई जा सकती हैं जैसे :- Advertisement Book,  Credit Collection. Day Book, Daily Cash Book .

प्रारंभिक लेखां पुस्तिकाओं की उपयोगिता :-

    1. खतौनी करने में सुगमता 
    2. विवरण की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है    
    3. अकाउंट का विभाजन एक आदर्श ढंग से कर सकते हैं        
    4. बेईमानी व धोखाधड़ी की संभावना  कम होते हैं      
    5. Trial Balance and Last Account बनाने में सहायता मिलती है

    Cash Book ( रोकड़ बही) :-  
                        प्रत्येक दिन के नकद लेनदेन लिखने के लिए व्यापारी अलग से एक पुस्तक का प्रयोग करता है जिसको Cash Book या रोकड़ बही कहते हैं इसमें सभी प्राप्ति और भुगतान का लेखा जोखा देश के क्रम में रखा जाता है Cash Book  का Balance भी Account  की विधि से निकाला जाता है या Balance  याद तो सुंय होता है या तो  Debit  होता है कभी Credit नहीं होता क्योंकि कुल प्राप्ति से अधिक भुगतान नहीं किया जाता हैं  |

    Cash Book  भी कई प्रकार के होते हैं  :-

    1. साधारण रोकड़ बही ( Simple Cash Book)
    2. दो खाने वाली रोकड़ बही ( Two Column Cash Book )
    3. तीन खाने वाली रोकड़ बही (Three Column Cash Book )
    4. खुदरा रोकड़ बही ( Peaty Cash Book )

    1. साधारण रोकड़ बही ( Simple Cash Book ) :-
                  साधारण रोकड़ बही उसे कहते हैं जिसमें बाय और सभी प्राप्तियां और दाएं और सभी भुगतान लिखे जाते हैं इस बही में नकद क्रय ,  नकद विक्रय  के लेखा-जोखा  को रखा जाता है यह Book  ऐसे व्यापारी के लिए लाभप्रद है जो केवल  Cash  संबंधित व्यापार करते हैं |


Date

Particular

V.N

L.P.N.

Rs.

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.


Questions :- 
    1. नगद पूंजी से व्यापार आरंभ किया    10000
    2. नगद क्रय                                        2500
    3. ताराचंद्र से नगद मॉल खरीदा            1000
    4. नगद बिक्री                                      3000
    5. प्रवीण से रोकड़ प्राप्त हुए                  5500
    6. अनिल से प्राप्त हुए                           1200
    7. गुप्ता ब्रदर्स को दिया                        500
    8. वेतन दिया                                      1000
    9. सुधीर से प्राप्त हुआ                         800   
    10. राधे को दिया                                200
    
    Solution :- 

Date

Particular

V.N

L.P.N.

Rs.

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.

1.

To Capital

2.

By Purchase

2500

3.

By Purchase

1000

4.

To Sale

3000

5.

To Pravin

5500

To Anil

1200

7.

By Gupta Brothers

500

8.

By Salary

1000

9.

To Sudheer

800

10.

By Radhe

200



    2. दो खाने वाली रोकड़ बही (Two Column Cash Book ) :-

                 इस रोकड़ बही में रकम के खाने से पूर्व छूट के खाने का प्रयोग किया जाता है नगद लेनदेन की मात्रा में वृद्धि हेतु  Cash Receive  होने पर Discount  देने की प्रथा है हम ग्राहकों को छूट प्रदान करते हैं इसके विपरीत भुगतान देने पर छूट प्राप्त की जाती है जो खाने वाली रोकड़ वही ने यह पता लगाना सरल हो जाता है कि किस ग्राहक को कितनी छूट दी गई तथा हमारे द्वारा भुगतान करने पर उससे कितनी छूट प्राप्त है इस बही में कुल 12 खाने तथा एक एक पक्ष में 6 खाने होते हैं क्योंकि दो पक्षों में 1 -1  खाना छूट का और बढ़ा दिया जाता है जिसक प्रारूप निम्न प्रकार होता है |

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.

Discount

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.

Discount



    3. तीन खाने वाली रोकड़ बही  (Three Column Cash Book) :-  
       
                  सामान्यतः जिन व्यापारियों के Bank  संबंधित लेनदेन बहुत अधिक होते हैं व्यापारी Bank  से अपना चालू खाता  खोल लेते हैं व्यापारी Bank  संबंधित लेनदेन को अपनी सुविधा अनुसार Passbook में लिख लेता है इस  Passbook में Discount एवं Amount के खाने के बाद 1 - 1 खाना Bank का भी बना लिया जाता है इस तरह से यह Cashbook , Amount ,  Discount  एवं Bank  तीन खानाे वाली रोकड़ बही कहलाती है इसका प्रारूप निम्न प्रकार होता है

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.

Bank

Discount

Date

Particular

V.N.

L.P.N.

Rs.

Discount

Bank



    4. खुदरा रोकड़ बही (Peaty Cash Book ) :-   
                        व्यापार में बहुत से व्यय दिन प्रतिदिन ऐसे होते हैं जो रकम की दृष्टि से छोटे परंतु संख्या की दृष्टि से अधिक होते हैं यदि इनको मुख्य Cashbook   में लिखेंगे तो Cashbook  बहुत विस्तृत और जतिन हो जाएगी अतः इस प्रकार के छोटे छोटे व्यय  को देखने के लिए व्यापारी एक उत्तम पुस्तक का प्रयोग करता है जिसे खुदरा रोकड़ या Peaty Cashbook  करते हैं इस पुस्तक में लिखने की विधि यह है कि बड़े Cash ear  से एक निश्चित समय के निश्चित धनराशि छोटे Cash ear  को दे दी जाती है छोटा Cash ear  इस रकम से फुटकर व्यय   करता रहता है और माह की समाप्ति पर बड़े  Cash ear  द्वारा व्यय की छूट धनराशि पुन प्रदान कर दी जाती है जिसे परिणाम स्वरूप छोटे  Cash ear  के पास पहले की तरह रकम हो जाती है |


    खुदरा रोकड़ बही दो प्रकार की होती है -

        1. Simple Peaty Cash Book ( साधारण खुदरा रोकड़ बही  ) :-
                             इस बही में छह खाने बनाए जाते हैं जिसमें बड़े Cash ear से प्राप्त राशि लिखकर उनमें से होने वाले सभी खर्चों का ब्याैरा लिखते हैं जिसका प्रारूप में निम्न प्रकार है |

    2. Analytical Peaty Cash ( खुदरा रोकड़ बही) :-
                              इस महीने व्यय   की विभिन्नता के आधार पर विभिन्न खाने बनाए जाते है Book  में जितने खर्चों से संबंधित लेन देन होते हैं उतने ही खाने बनाए जाते हैं 
जिनका प्रारूप निम्न प्रकार है -


        Trial Balance (तलपट ) :-
                  दोहरी लेखा प्रणाली की अवधारणा है की सभी खाते की Debit पक्ष का योग  Credit पक्ष के योग के बराबर होता है इस तरह की सभी खातों की खतौनी की गणना संबंधित शुद्धता की जांच के लिए जो List  बनाई जाती है उसे Trail Balance कहते हैं सामान्यता प्रत्येक वर्ष के अंत में एक निश्चित दिन Trail balance  तैयार किया जाता है जिसमें व्यापार के अंतिम खाते बनाने में सहायता मिलती है Trail Balance बही खातों से प्राप्त Debit , Credit  दोनों प्रकार के शेषाे की List  होती है 
जिनका  प्रारूप निम्न प्रकार बनाया जाता है |


        Trail Balance बनाने के उद्देश्य :-
        Trail Balance बनाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है :-

    1. खातों को बंद करके और उनके शेषाे को संक्षिप्त विवरण प्राप्त करने के लिए
    2. गणित संबंधित शुद्धता की जांच कराने के लिए
    3. अंतिम खाते तैयार करने के लिए
    4. गत वर्ष के  Trail Balance से तुलना कर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकालने के लिए

        Trail Balance की विधि :-
        Trail Balance बनाने की विधियां निम्नलिखित हैं :- 

      1. योग विधि  :- 
                इस विधि द्वारा Trail Balance बनाने के लिए समस्त खातों के  व धनी पक्षों के योग Type Balance  के Debit  और Credit  खातों में क्रमानुसार लिख दिए जाते हैं इस प्रकार Trail Balance बनाने में Trail Balance का योग रोजनामचा Journal के योग के बराबर होता है |

     2.  शेष विधि  :-
                 इस विधि द्वारा Trail Balance बनाने के लिए समस्त खातों  के  Debit  Credit  पक्षो के शेष Trail Balance  के Debit  Credit  खातों में क्रमानुसार लिख दिए जाते हैं इस विधि को अत्याधिक लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि रकमो की संख्या छोटी हो जाती है और Trail Balance  योग लगाने में सरलता होती है |

Trial Balance द्वारा ज्ञात होने वाली अशुद्धियां :-

  यदि Trail Balance  का Debit  व Credit  बराबर नहीं होता है तो ऐसी अशुद्धियों को पता Trail Balance  द्वारा लगाया जाता है Trail Balance  द्वारा ज्ञात होने वाले अशुद्धियां निम्नलिखित हैं -

    1. Trial Balance , का योग लगाने में अशुद्धि
    2. विपरीत पक्ष में हुई खतौनी की अशुद्धि
    3. किसी खाते के योग्य शेष निकालने की अशुद्धि
    4. खतौनी करते समय किसी रकम का गलत लिखा जाना
    5. Trail Balance  बनाते समय किसी खाते का छूट जाना
    6. Trail Balance मे किसी खाते की गलत रकम लिखे जाना

       Bank Reconciliation statement ( बैंक समाधान विवरण) :-                                                व्यापारियों को Bank  में चालू खाता खोलना होता है और वह सभी लेनदेन इसी Bank  में करते हैं इसका लेखा-जोखा करने के लिए व्यापारियों के पास तीन खाने वाली रोकड़ बही होती है जबकि उसका लेखा-जोखा उसके Passbook  में करता है इस तरह बनाए गए Cashbook  और Passbook  के Balance  का मिलान करने के लिए जो विवरण पत्र बनाए जाते हैं उसे  Bank Reconciliation Statement  या Bank समाधान विवरण कहते हैं इस विवरण पत्रों द्वारा Cashbook और Passbook  के अंतर ज्ञात हो जाते हैं दोनों पुस्तकों के अंतर का कारण केवल त्रुटि ही नहीं होती बल्कि कई कारण हो सकते हैं जिनके प्रभाव में Balance  में भिन्नता दिखाई देती जो निम्न प्रकार है

    1. चेक दिए गए लेकिन भुगतान की प्रस्तुति नहीं हुई :-
                       व्यापारी द्वारा किसी भी व्यक्ति या Party  को दिया गया Check Bank  में यदि भुगतान की प्रस्तुति न किया जाए तो Cash book  और Pass book  में अंतर आ जाता है कारण यह है कि व्यापारी अपनी बही में उस राशि को पहले ही जोड़ कर लिख लिया जाता है परंतु Bank  के पास वही पुराना Balance  होता है

    2. चेकों की वापसी :-
                             वह Check  जो व्यापारी द्वारा भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं लेकिन किसी कारण से उसे अदा करता के खाते में पर्याप्त राशि ना हो वापस आ जाते हैं और  व्यापारी अपनी Cash book  में पहले ही लिख लेता है वापसी की सूचना ना मिल पाने या Statement  आते समय उसकी entry न कर पाने के कारण या भिन्नता जा सकती है

    3. बैंक में सीधे जमा :-
                             ग्राहकों द्वारा कभी-कभी कुछ राशियां Bank  में सीधे जमा कर दी जाती है जिसके बारे में व्यापारी को सूचना नहीं है ऐसे भुगतान ओं के कारण भी Statement  में अंतर आ जाता है

     4. बैंक द्वारा सीधे भुगतान :-
                     Bank  द्वारा व्यापारियों और उसके ग्राहकों के बीच मध्यस्थता की भी आवश्यकता पड़ती है जब कभी व्यापारी का बीमा या किस्त का भुगतान किया जाता है तो ऐसे भुगतान स्वयं कर लेता है जिसके Bank के Book  में वह राशि कम हो जाती है जबकि व्यापारिक के Passbook  में उस राशि की निकासी होती है

        5. बैंक चार्जेज :-
                   Current book account, धारकों से सेवा शुक्र प्राप्त करना भी Bank  के आय का स्रोत है अपने द्वारा दी गई सेवाओं के अनुसार Bank  में अपने खाता धारकों के खाते से राशि निकाल लेता है जो Bank  द्वारा तैयार की जाने वाले Passbook  में अंकित की  जाती है परंतु व्यापारी उसे अपने Passbook  में नहीं लिख पाता है

    6. बैंक से ब्याज प्राप्त :-   
                    Bank  अपने खाताधारकों को उनके द्वारा जमा किए गए धन पर ब्याज भी देता है जिसस Bank  स्वयं खाता धारक के खाते में जमा कर देता है ऐसी राशियों को  व्यापारी स्वयं अपने Cashbook  में नहीं लिख पाता है अतः इस कारण भी Statement  में अंतर आ जाता है
Last A/c ( अंतिम खाते)    वर्ष भर व्यापार करने के बाद व्यापारियों को यह जानने की आवश्यकता है कि उन्हें व्यापार में पूरे वर्ष में कितना लाभ हुआ या हानि हुआ अंतिम खाते इस प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के सबसे अच्छे प्रमाण होते हैं अंतिम खातों में Profit And Loss A/C ,  And Balance Sheet  प्रमुख होते हैं

   अंतिम खाते बनाने से निम्न लाभ होते हैं -

    1. कुल लाभ अथवा हानि की जानकारी :-
                 वर्ष भर में  व्यापार के दौरान कुल कितना लाभ हुआ या हानि हुई यह जानकारी प्राप्त करना अंतिम खाते का प्रमुख उद्देश्य है

    2. शुद्ध लाभ या हानि की जानकारी ;-
                  अपने व्यापार के अनुसार व्यापारी को भिन्न भिन्न प्रकार के खर्चे करने होते हैं जैसे कमरे का किराया बिजली का बिल कर्मचारी की वेतन ऐसे खर्चे व्यापार संचालन के व्यय कहलाते हैं माल के क्रय-विक्रय से प्राप्त लाभ में से संचालन के लिए घटा देने पर व्यापारी को शुद्ध लाभ का ज्ञात हो जाता है
    3. आर्थिक स्थिति की जानकारी :-
                     शुद्ध लाभ द्वारा व्यापारी की पूंजी बढ़ती है और सुधानी द्वारा पूजी कम  होती है अंतिम खाते देखकर व्यापारी को वास्तविक आर्थिक स्थिति की जानकारी मिल जाती है

    4. संपत्तियों एवं दायित्व के जानकारी :- 
                    अंतिम खातों की सहायता से व्यापारी को अपने संपत्तियों एवं दायित्व के वास्तविक मूल्य की जानकारी दी जाती है

    5. देनदारों एवं लेनदाराे का  ज्ञान :-
            अंतिम खाते बनाने के बाद ही व्यापारी को अपने देनदाराे व लेनदाराे  की कुल मात्रा का ज्ञान होता है

        समायोजन खाता (Adjustment A/c) :-
             खातों की वार्षिक बंदी के समय तक व्यापार के लेनदेन चलते रहते हैं यद्यपि व्यापार के सभी अंतिम समय तक लेनदेन को खातों में लिखने का प्रयास किया जाता है परंतु फिर भी कुछ कुछ लेनदेन लिखने के लिए रह जाते हैं ऐसे लेनदेन अगले वित्तीय वर्ष के खाते में समायोजन खाते के अंतर्गत लिखने का प्रावधान है समायोजन का अंतिम खातों में दो स्थानों पर विशेष प्रभाव पड़ता है जो निम्नलिखित है

    1. अंतिम रहतिया (Closing Stock )
    2. अदत्त व्यय  (Out Standing Expenses )
    3. पूर्व  दत्त ( Repaid Expenses )
    4. उपार्जित आय. (Accrued Income)
    5. अनूपार्जित आय (Un  earned Income l
    6. हास् (Depreciation )
    7. अशाेध्य एवं संदिग्ध ऋण संचित( Red debt reserve )
    8. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यय ( Direct Expense And Indirect Expense )

    1. अंतिम रहतिया (Closing Stock ) :-
             व्यापारी वर्ष के अंत में जो माल बिकने से रह जाता है वह अंतिम रतिया कहलाता है

    2. अदत्त व्यय  (Out Standing Expenses ) :-
             ऐसे व्यय   जिनका संबंध चालू वर्ष से तो होता है परंतु उसका वर्ष के अंत तक भुगतान नहीं हो         पाता है आदत वह अदत्त व्यय  कहलाता है

    3. पूर्व  दत्त  ( Repaid Expenses ) :-
           कुछ व्यय  इस प्रकार के होते हैं जिनका संबंध तो अगले वर्ष से होता है लेकिन उनका भुगतान         चालू वर्ष में ही कर दिया जाता है तो ऐसे वह को  पूर्व  दत्त कहते हैं

    4. उपार्जित आय (Accrued Income ) :-  
             वह आए जिसका संबंध तो चालू वर्षों से होता है परंतु वर्ष के अंत तक रकम प्राप्त नहीं हो                     पाती है उपार्जित आय या अप्राप्त आय कहलाता है

    5. अनूपार्जित आय (Un  earned Income ) :-
             कभी-कभी कुछ ऐसी ही मिलती है जो चालू वित्तीय वर्ष में को प्राप्त हो जाती है परंतु                             उसका संबंध  अगले वित्तीय वर्ष से होता है

    6. हास (Depreciation) :-
             व्यापार में कुछ संपत्ति.  इस प्रकार की होती है जिनका समय व्यतीत हो जाने पर मूल्य में कमी आ जाती है और भविष्य में उनका मूल्य नहीं रहता मूल्य पर विक्रय की गई थी इस प्रकार संपत्ति के मूल्य में कमी को हास कहते थे

    7. अशाेध्य एवं संदिग्ध ऋण संचित( Red debt reserve ) :-
             व्यापार में कुछ देनदार ऐसे भी होते हैं जिनसे रकम मिलने की संभावना कम रहती है इस तरह के संदेह ऋणों की पूर्ति के लिए  कुछ  राशि प्रतिवर्ष  संचित  के रूप में रख लेते हैं इस इस संचित राशि को ही अशाेध्य एवं संदिग्ध ऋण संचित  कहते हैं यह राशि  देनदार के अनुसार एक निश्चित. %  के रूप में रखी जाती हैं

    प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष (Direct Expenses or Indirect Expenses) :-
         
        प्रत्यक्ष 
व्यय  तथा अप्रत्यक्ष  व्यय   दो प्रकार के होते हैं -

    1. Direct Expenses ( अप्रत्यक्ष) :-
           प्रत्यक्ष व्यय होते हैं जो व्यापारी पक्ष में डेबिट के पक्ष में लिखे जाते हैं और  जिनका सीधा संबंध व्यापार से होता है जैसे मजदूरी , किराया,  टेलीफोन व बिजली बिल आदि 

    2. Indirect Expenses ( अप्रत्यक्ष) :- 
            अप्रत्यक्ष व्यय होते हैं जो व्यापार से सीधे संबंध नहीं रखते हैं जैसे Sale,  Text Income , Text                 Insurance etc.

    चल एवं अचल संपत्ति :-

         व्यापार में प्रयुक्त होने वाली संपत्तियां को दो श्रेणियों में बांटा गया है -

    1. चल संपत्ति (Movable Property) :- 
                चल संपत्ति उसे कहते हैं जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है जैसे Cash , Pay Bill , Saving, Certificate etc.
 
    2. अचल संपत्ति (Fix Assets Property) :-
                  अचल संपत्ति वह  संपत्ति  होती है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जा सकते जैसे Building, Factories, Garden, etc.

    प्रेषण खाते (Consignment Accounts) :- 
                 व्यापार में अक्सर व्यापारी अपने उत्पादों को स्वयं नहीं बेता बल्कि दूसरे शहरों में नियुक्त किए गए डीलरों के माध्यम से बेता है मुख्य व्यापारी द्वारा दूसरे व्यापारी के माध्यम से माल बेचने के संबंध में बनाए गए खाते प्रेषण खाते कहलाते हैं

    साझेदारी खाता  ( Join Venture A/c) :-   
            जब कभी दो या अधिक व्यक्तियों या फर्मों द्वारा किसी समझौते के तहत व्यापार किया जाता है जिसमें लाभ हानि का परसेंटेज आपस में बांटने का एक निश्चित अनुपात एवं मापन होता है  तो ऐसे व्यापार को Joint Venture खाता कहते हैं  Joint Venture  एक तहत की अस्थाई साझेदारी है जिसका एक लक्ष्य निर्धारित होता है और लक्ष्य को पूरी हो जाने पर यह साझेदारी समाप्त हो जाती है किसी पर कोई दायित्व नहीं रहते इस प्रकार के कार्य समाप्त होने के बाद लाभ या हानि को सभी साझेदारी में बांट लेते हैं

        Joint Venture and Partnership में  अंतर -
  
Joint Venture, Partnership, मैं समानत: निम्न अंतर होते हैं -

    1. Partnership  में फॉर्म का 1 नाम होता है किंतु Join Venture  में फार्म का कोई नाम नहीं होता है

    2. Partnership  भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के द्वारा नियंत्रित होती है जबकि Joint                     Venture  पर किसी तरह का नियम लागू नहीं होता है

    3. Partnership  में  Partner  की संख्या निश्चित होती है जबकि Joint Venture में ऐसा कुछ नहीं                 होता है यह संख्या सुविधा अनुसार घटाया या बढ़ाई जा सकती है

    Good will ( ख्याति या प्रसिद्धि) :-
                               Goodwill , किसी Company के  आय  के  आगे बढ़ाने का एक कारण माना जाता है जब कोई  Company  व्यापार आरंभ करती है तो बाजार में उसकी कोई  Good Will नहीं होती परंतु सब व्यवहार   , इमानदारी  , उत्तम माल देने  , उचित मूल्य लेने ,  और सेवा शर्तों को पूरा करते रहते पर सीधे-सीधे बाजार में उस  Company की पहचान बन जाती है जिसके आधार पर व्यापारी अपने पुराने ग्राहकों से आगे माल बेचने के लिए अभ्यास रहता हैGood Will  व्यापार की एक संपत्ति है परंतु व्यापार से अलग है इसका कोई मूल्य नहीं है

Good will का मूल्यांकन :-
             Good will का मूल्यांकन करना एक कठिन कार्य है विक्रय मूल्य व्यापार के स्वभाव मात्र तथा अन्य परिस्थिति का  Good will पर प्रभाव पड़ता है जिन अवसरों पर Good will  के मूल्यांकन की आवश्यकता है
  
    1. जब फर्म में किसी  New  Partner का प्रवेश हुआ हो
    2. जब कोई Partner अवकाश ग्रहण किया है
    3. जब Partner के लाभ हानि वितरण के अनुपात  परिवर्तन किया जाए
    4. जब  Partner  द्वारा उसका हिस्सा बेचा जाए
    5. जब फर्म के लाभ प्राप्त करने की पद्धति में बदलाव किया जाए

        Good will के मूल्यांकन की विधियां  :- 
                    Good will  का मूल्यांकन करना एक कठिन कार्य सामान्यतः इसका मूल्यांकन एवं विधि के आधार पर किया जाता है इसकी दो विधियां निम्नलिखित है
    1.पिछले कुछ वर्षों के औसत लाभ को आधार मानकर
    2. अधिलाभ के लाभ को आधार मानकर 


    Tally में Groups :-

यहाँ हम टैली के सभी ग्रुप्स को डिटेल में समझने वाले हैं जो कि लेजर क्रिएशन के लिये बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है।  आपकी सुविधा के लिये यहाँ पर टैली के सभी ग्रुप्स की लिस्ट (List of Groups in Tally in Hindi) भी हिन्दी में एक्सप्लेनेशन के साथ दी गई है।

टैली में ग्रुप क्या है (What is group in tally)

अकाउंटिंग ग्रुप्स एक ही प्रकार के या एक ही स्वभाव के लेजर्स का एक संग्रह (Collection) होता है।

इन ग्रुप्स की सहायता से ही टैली को यह जानकारी मिलती है कि बनाया जा रहा लेजर खर्चे का लेजर है, आय का लेजर है, संपत्ति का लेजर है या दायित्व का लेजर है।

ग्रुप्स की सहायता से ही टैली को यह जानकारी भी मिलती है कि लेजर को व्यापार खाते (Trading Account)  में लेना है या लाभ हानि खाते (Profit & Loss Account)  में लेना है या फिर Balance Sheet में लेना है।

टैली में कितने ग्रुप्स होते हैं?

Groups in Tally

टैली में 28 ग्रुप्स होते हैं, इनमें से 15 ग्रुप्स प्रायमरी होते हैं और 13 ग्रुप्स इन प्रायमरी ग्रुप्स के सब ग्रुप्स होते हैं।  आवश्यकतानुसार आप और भी ग्रुप्स बना सकते हैं

तो यहाँ पर List of Groups in Tally में हम प्रत्येक ग्रुप को डिटेल में समझने वाले हैं।

List of Groups in Tally in Hindi

Bank Accounts –

इस ग्रुप का उपयोग बैंक में खोले गये Current एवं Saving Accounts के लिये किया जाता है।  यदि आपने अपने व्यापार या अपनी फर्म या कंपनी के लिये बैंक में कोई खाता खुलवाया है तो लेजर क्रिएशन के समय Name of Accounts फिल्ड में आपको उस बैंक का नाम लिखना है जिस बैंक में आप खाता खुलवा रहे हैं।  आप बैंक के नाम के साथ खाते का टाईप भी लिख सकते हैं जैसे कि Current A/c या Saving A/c।  आप चाहें तो साथ में खाता नंबर भी जोड़ सकते हैं।

 Bank Accounts Group

Bank OCC Account / Bank OD Account –

Cash Credit या Over Draft के लेजर के लिये इस ग्रुप का उपयोग किया जाता है।  ये एक प्रकार से ऋण के ही खाते होते हैं किन्तु ये होम लोन या वाहन ऋण से भिन्न होते हैं और एक लम्बे समय के ऋण नहीं होकर एक लिमिट में समय-समय पर आवश्यकतानुसार पैसा ऋण के तौर पर बैंक से लिया जाता है और समय-समय पर जमा भी करा दिया जाता है।

Branch Division Account –

शाखा खातों के लिये इस ग्रुप का उपयोग किया जाता है।

Branch Division in Tally

Capital Account –

व्यापारी एवं साझेदारों के पूँजी खाते के लिये इस ग्रुप का उपयोग किया जाता है।

Capital A/c  वह लेजर है जो बताता है कि व्यापार के स्वामी या स्वामियों ने व्यापार में अपना स्वयं का कितना पैसा लगाया है।  यदि व्यापार प्रारंभ करने के लिये कोई लोन लिया है तो वह राशि इस लेजर में नहीं आयेगी, लोन के लिये अलग से लेजर बनाया जायेगा।

यदि व्यापार एकल स्वामित्व का है या Sole Proprietorship का है तो Ledger Name में आप सिर्फ Capital A/c टाईप कर सकते हैं।

यदि व्यापार पार्टनरशीप का है तो साथ में पार्टनर के नाम भी जोड़े जाने चाहिये जैसे कि Ravi’s Capital A/c, Mohan’s Capital A/c, Ravi’s Current A/c, Mohan’s Current A/c  आदि।

कंपनी की दशा में Share Capital, Equity Share Capital A/c बनाये जा सकते है।

Cash in hand –

रोकड़ खाता (Cash Account) इस ग्रुप के अंतर्गत टैली में पहले से ही बना रहता है।  इसलिये Cash Account फिर से बनाने की सामान्य तौर पर जरूरत नहीं होती है, किन्तु यदि किसी व्यापार में एक से ज्यादा रोकड़ खाते मेंटेन किये जा रहे हों तो बनाये जा सकते हैं।

Cash in Hand

Current Assets –

ऐसी चालू सम्पत्तियाँ जिनके लिये अलग से कोई ग्रुप नहीं बना है इसके अंतर्गत लेतें हैं। जैसे Bills Receivable, Accrued (Earned) Income, Prepaid Exp.  आदि।

Current Liabilities –

ऐसे चालू दायित्व जिनके लिये अलग से कोई ग्रुप नहींo बना है इसके अंतर्गत लेतें हैं। जैसे Bills Payble,Unaccrued Income, Out Standing Exp. आदि।

Current Liabilities Group

Deposit Assets –

हमारे द्वारा किसी भी प्रकार की की गई जमायें इस ग्रुप में आती हैं जैसे टेलीफोन डिपोजिट, व्यापारी संघ डिपोजिट, सेल्स टेक्स डिपोजिट अथवा किसी भी कंपनी की एजेंसी  के लिये किया गया डिपोजिट

Direct Exp. / Expenses (Direct) –

सभी प्रत्यक्ष व्यय इस ग्रुप के अंदर आते हैं।

Direct Expenses या Expenses Direct उन खर्चों को कहा जाता है जो सीधे-सीधे माल के Purchase] उसके Storage या उसके Production से संबंधित होते हैं।

इस ग्रुप के अंतर्गत Purchase A/c को छोड़कर वे लेजर्स आते हैं जो Trading A/c में लिये जाते हैं जैसे Godown या Factory का किराया Wages या Labour, Coal & Fuel आदि।

Expenses in Tally in Hindi

 

Direct Income / Income (Direct) –

सभी प्रत्यक्ष आय इस ग्रुप के अंतर्गत आती हैं जैसे अखबार के लिये विज्ञापन की आय, जॉब वर्क करने की आय आदि।

Duties & Taxes –

सभी Duties या Taxes  इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं जैसे CGST, SGST, VAT आदि।

Fixed Assets –

सभी स्थायी संपत्तियाँ इस ग्रुप के अंतर्गत आती हैं जैसे  भवन, फर्नीचर, मशीनरी आदि।

Indirect Expenses / Expenses (Indirect) –

सभी अप्रत्यक्ष व्यय इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं।

Indirect Expenses या (Expenses Indirect) उन खर्चों को कहा जाता है जो सीधे-सीधे माल के Purchase, उसके Storage या उसके Production से संबंधित नहीं होते हैं।

इस ग्रुप के अंतर्गत खर्चों के वे लेजर्स आते हैं जो Profit & Loss A/c  में लिये जाते हैं जैसे Interest, Salary, Office/Shop Rent, Telephone Expenses, Travelling Expenses आदि।

Indirect Income / Income (Indirect) –

सभी अप्रत्यक्ष आय (Indirect Income) इस ग्रुप के अंतर्गत आती हैं।

Indirect Income या Income (Indirect) उन आय को कहा जाता है जो सीधे-सीधे हमारे Business की Activity से नहीं होती है, जैसे कि यदि हमारा व्यापार गेहूँ विक्रय का है और हमें ब्याज से कोई आय होती है तो वह हमारे व्यापार की आय न होकर अन्य आय है और इसलिये यह Indirect Income कहलाएगी।

इस ग्रुप के अंतर्गत Income के वे लेजर्स आते हैं जो Profit & Loss A/c में लिये जाते हैं जैसे Interest, Discount, Commission आदि।

Investments –

सभी विनियोगों के खाते इस ग्रुप में आते हैं जैसे शेयर, बॉण्ड आदि।

Loans & Advances (Assets) –

ऐसे ऋण व एडवांस जो हमारे द्वारा अन्य पार्टियों को दिये गये हैं, इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं।

Loans (Liability) –

हमारे द्वारा लिए गए ऋण इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं चाहे वे Secured loan हों या unsecured loan ।

वैसे Tally में Securerd loan और Unsecured loan के लिये अलग से भी ग्रुप दिये गए हैं।

Misc. Expenses (ASSET) –

ऐसे विविध व्यय जो सामान्यतः व्यापार या कंपनी की स्थापना के व्यय होते हैं इन्हें एक ही वर्ष का खर्चा न माना जाकर आगे के कई वर्षों में बाँट दिया जाता है। हर वर्ष का भाग उस वर्ष के खर्चे के रूप में Profit & Loss A/c में ट्रांसफर कर दिया जाता है और बचा हुआ भाग Balance Sheet में संपत्ति पक्ष में Misc. Expenses (ASSET) के रूप में रखा रहता है।

इस कारण से वास्तविकता में Misc. Expenses (ASSET) खर्चे नहीं हैं ये संपत्ति हैं।

Provisions –

ऐसे खर्च जिनकी वास्तविक राशि का हमें ज्ञान नहीं है किन्तु अंदाजे से हम उस खर्चे का प्रावधान कर लेते हैं तो वे प्रावधान इस ग्रुप में आते हैं।

Purchase Accounts –

सभी क्रय खाते एवं क्रय वापसियों के खाते इस ग्रुप में आते हैं।

यदि हम अपने Purchase Accounts को अलग-अलग दिखाना चाहें तो हम Wheat Purchase A/c, Rice Purchase A/c या Purchase 28%, Purchase 5% आदि नाम से Purchase Accounts ग्रुप में लेजर्स बना सकते हैं।

Reserves & Surplus / Retained Earnings –

ऐसे अविभाजित लाभ या आधिक्य जो पूँजी खाते या साझेदारों के पूँजी खाते में ट्रांसफर नहीं किए गए हैं इस ग्रुप के अन्तर्गत आते हैं।

Sales Accounts –

सभी विक्रय खाते एवं विक्रय वापसियों के खाते इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं।

यदि हम अपने Sales अकाउंट्स को अलग-अलग दिखाना चाहते हैं तो हम T.V. Sales A/c, Cooler Sales A/c या Sales 18%, Sales 12% आदि बना सकते हैं।

Secured Loans –

ऐसे ऋण जिनके बदले में हमारे द्वारा कुछ गिरवी या जमानत के तौर पर रखा गया है इस ग्रुप के अंतर्गत आते हैं।

Stock in hand –

जब हम स्टॉक की गणना टैली से नहीं करवाके खुद गणना करके स्टॉक डाल देते हैं तो ऐसा स्टॉक इस ग्रुप के अन्तर्गत रखा जाता है।

Sundry Creditors –

सभी लेनदारों के खाते इस ग्रुप में आते हैं।  लेनदार हमें उधार माल की सप्लाई करते हैं।

Sundry Debtors –

सभी देनदारों के खाते इस ग्रुप में आते हैं।  देनदार हमारे कस्टमर होते हैं जिन्हें हम उधार माल देते हैं।

Suspence A/c –

ऐसे खाते जिनके बारे में हमें ज्ञान नहीं है, या कुछ भूल हुई है जिसके कारण books में अंतर आता है वे खाते इस ग्रुप में आते हैं।  जैसे यदि हमारी Cash Book में Cash का Balance 20000/- आ रहा हो और वास्तव में गल्ले में Cash 25000/- हो तो Suspence A/c के जमा करके रोकड़ के नामे किये जाते हैं।

बाद में जब भूली हुई प्रविष्टि की जानकारी हो जाती है तब उसे सुधार लिया जाता है।

Unsecured Loans –

ऐसे ऋण जिन्हें प्राप्त करने के लिये कोई Security नहीं दी

 गई हैं इस ग्रुप में आते हैं।

                           Bank Entry 

नमस्कार! यहाँ विभिन्न बैंक ट्रांसफर विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है:


### 1. **एनईएफटी (NEFT)**

   - **पूरा नाम:** राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर

   - **विशेषताएँ:** यह एक ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सिस्टम है जिसमें पैसे एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। यह आमतौर पर कार्य दिवसों में चलती है और लेनदेन एकत्रित रूप से निपटाए जाते हैं।


### 2. **आरटीजीएस (RTGS)**

   - **पूरा नाम:** रियल-टाइम ग्रॉस सेट्लमेंट

   - **विशेषताएँ:** यह एक तत्काल फंड ट्रांसफर सिस्टम है, जहाँ लेनदेन तुरंत निपटाए जाते हैं। यह बड़ी राशि के लिए उपयुक्त है और इसका उपयोग आमतौर पर उच्च मूल्य वाले लेनदेन में किया जाता है।


### 3. **ई-फंड ट्रांसफर (EFT)**

   - **विशेषताएँ:** यह एक सामान्य टर्म है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक रूप से फंड ट्रांसफर के लिए किया जाता है, जिसमें एनईएफटी और आरटीजीएस दोनों शामिल हैं। यह सामान्यत: स्वचालित और सुरक्षित ट्रांसफर के लिए उपयोग होता है।


### 4. **एटीएम (ATM)**

   - **विशेषताएँ:** एटीएम मशीनों का उपयोग नकद निकालने, बैलेंस चेक करने, और फंड ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। यह 24/7 उपलब्ध होती हैं और उपयोगकर्ता अपनी सुविधानुसार लेनदेन कर सकते हैं।


### 5. **कार्ड (Debit/Credit Card)**

   - **विशेषताएँ:** डेबिट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग दुकानों और ऑनलाइन खरीदारी के लिए किया जाता है। डेबिट कार्ड सीधे आपके बैंक खाते से जुड़ा होता है, जबकि क्रेडिट कार्ड आपके क्रेडिट लिमिट पर आधारित होता है।


### 6. **चेक (Cheque)**

   - **विशेषताएँ:** चेक एक लिखित आदेश होता है जो एक बैंक को पैसे निकालने के लिए निर्देश देता है। यह एक पारंपरिक तरीका है और कई व्यवसायों में अभी भी उपयोग में है।


### 7. **ईसीएस (ECS)**

   - **पूरा नाम:** इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस

   - **विशेषताएँ:** यह एक ऑटोमेटेड सिस्टम है जिसका उपयोग नियमित भुगतान जैसे सैलरी, बिल्स और निवेश के लिए किया जाता है। इसमें पैसे एक निश्चित अंतराल पर ऑटोमेटिकली ट्रांसफर होते हैं।


### 8. **इलेक्ट्रॉनिक चेक (e-Cheque)**

   - **विशेषताएँ:** इलेक्ट्रॉनिक चेक एक डिजिटल रूप में चेक है जिसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा और स्वीकार किया जाता है। यह कागज़ के चेक की तरह कार्य करता है लेकिन ऑनलाइन होता है।


### 9. **इलेक्ट्रिक डीओपीओ (DOP)** 

   - **विशेषताएँ:** यह एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है जिसका उपयोग डाक विभाग के माध्यम से लेनदेन के लिए किया जाता है। यह सामान्यत: सरकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए उपयोग होता है।


ये सभी विकल्प अपने-अपने तरीकों से फंड ट्रांसफर करने में सहायक होते हैं, और उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा प्रदान करते हैं।


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