History and Development of Computer
(कंप्यूटर का
इतिहास और विकास)
अगर आप कंप्यूटर के बारे में नए तरीके से जानना चाहते हैं तो आप नीचे दिए गए ऑडियो लेसन को जरुर सुने| यह ऑडियो हेमा सिंह सेंगर द्वारा हमारी वेबसाइट के लिए रिकॉर्ड किया गया है|
Table of Contents
· History and Development of Computer (कंप्यूटर का इतिहास और विकास)
o Abacus
o A.B.C. (Atanasoff 7– Berry Computer)
Abacus
Computer का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है| जब चीन में एक calculation Machine Abacus का अविष्कार हुआ था यह एक Mechanical Device है जो आज भी चीन, जापान सहित एशिया के अनेक देशो में अंको की गणना के लिए काम आती थी| Abacus तारों का एक फ्रेम होता हैं इन तारो में बीड (पकी हुई मिट्टी के गोले) पिरोये रहते हैं प्रारंभ में Abacus को व्यापारी Calculation करने के काम में Use किया करते थे यह Machine अंको को जोड़ने, घटाने, गुणा करने तथा भाग देने के काम आती हैं|
Blase Pascal
शताब्दियों के बाद अनेक अन्य यांत्रिक मशीने अंकों की गणना के लिए विकसित की गई । 17 वी शताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Baize Pascal) ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र (Mechanical Digital Calculator) सन् 1645 में विकसित किया गया । इस मशीन को एंडिंग मशीन (Adding Machine) कहते थे, क्योकि यह केवल जोड़ या घटाव कर सकती थी । यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करती थी । उसमें कई दाँतेयुक्त चकरियाँ (toothed wheels) लगी होती थी जो घूमती रहती थी चक्रियों के दाँतो पर 0 से 9 तक के अंक छपे रहते थे प्रत्येक चक्री का एक स्थानीय मान होता था जैसे –इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि इसमें एक चक्री के घूमने के बाद दूसरी चक्री घूमती थी Blase Pascal की इस Adding Machine को Pascaline भी कहते हैं|
Jacquard’s Loom
सन् 1801 में फ्रांसीसी बुनकर (Weaver) जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़े बुनने के ऐसे लूम (Loom) का अबिष्कार किया जो कपड़ो में डिजाईन (Design) या पैटर्न (Pattern) को कार्डबोर्ड के छिद्रयुक्त पंचकार्डो से नियंत्रित करता था | इस loom की विशेषता यह थी की यह कपडे के Pattern को Cardboard के छिद्र युक्त पंचकार्ड से नियंत्रित करता था पंचकार्ड पर चित्रों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति द्वारा धागों को निर्देशित किया जाता था|
Charles Babbage
कप्यूटर के इतिहास में 19 वी शताब्दी को प्रारम्भिक समय का स्वर्णिम युग माना जाता है । अंग्रेज गणितज्ञ Charles Babbage ने एक यांत्रिक गणना मशीन (Mechanical Calculation Machine) विकसित करने की आवश्यकता तब महसूस की जब गणना के लिए बनी हुई सारणियों में Error आती थी चूँकि यह Tables हस्त निर्मित (Hand-set) थी इसलिए इसमें Error आ जाती थी |
चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक मशीन का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने वहन किया । उस मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन (Difference Engine) रखा गया, इस मशीन में गियर और साफ्ट लगे थे । यह भाप से चलती थी । सन् 1833 में Charles Babbage ने Different Engine का विकसित रूप Analytical Engine तैयार किया जो बहुत ही शक्तिशाली मशीन थी | बैवेज का कम्प्यूटर के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा हैं । बैवेज का एनालिटिकल इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना और यही कारण है कि चार्ल्स बैवेज को कमप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता हैं |
Dr. Howard Aiken’s Mark-I
सन् 1940 में विद्युत यांत्रिक कम्प्यूटिंग (Electrometrical Computing) शिखर पर पहुँच चुकी थी ।IBM के चार शीर्ष इंजीनियरों व डॉ. हॉवर्ड आइकेन ने सन् 1944 में एक मशीन विकसित किया यह विश्व का सबसे पहला “विधुत यांत्रिक कंप्यूटर” था और इसका official Name– Automatic Sequence Controlled Calculator रखा गया। इसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय को सन् 1944 के फरवरी माह में भेजा गया जो विश्वविद्यालय में 7 अगस्त 1944 को प्राप्त हुआ | इसी विश्वविद्यालय में इसका नाम मार्क- I पड़ा| यह 6 सेकंड में 1 गुणा व 12 सेकंड में 1 भाग कर सकता था|
A.B.C. (Atanasoff – Berry Computer)
सन् 1945 में एटानासोफ़ (Atanasoff) तथा क्लोफोर्ड बेरी (Clifford berry) ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन का विकास किया जिसका नाम ए.बी.सी.(ABC) रखा गया| ABC शब्द Atanasoff Berry Computer का संक्षिप्त रूप हैं | ABC सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (Electronic Digital Computer) था |
कंप्यूटर की अवधारणा
Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं, अर्थात् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं| इसमें डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रोसेस करने की क्षमता होती है। आप दस्तावेजों को टाइप करने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज़ करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं। आप स्प्रैडशीट्स, प्रस्तुतियों और यहां तक कि वीडियो बनाने के लिए इसका उपयोग भी कर सकते हैं।
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Computer System Concept (कंप्यूटर की अवधारणा)
कंप्यूटर सिस्टम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का एक संयोजन है। कंप्यूटर के भौतिक और मूर्त भागों / घटकों को देखा और स्पर्श किया जा सकता है जिन्हें हार्डवेयर के रूप में जाना जाता है। हार्डवेयर में कंप्यूटर सिस्टम के भौतिक घटक होते हैं जैसे इनपुट डिवाइस (कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, आदि), आउटपुट डिवाइस (मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर इत्यादि), प्रोसेसिंग डिवाइस (सीपीयू) और स्टोरेज डिवाइस कॉम्पैक्ट डिस्क, हार्ड डिस्क, डीवीडी, आदि।
सॉफ्टवेयर उन प्रोग्राम्स और निर्देशों का सेट है जो कंप्यूटर सिस्टम के संचालन को नियंत्रित करते हैं। कंप्यूटर सिस्टम अपने आप कुछ नहीं कर सकता है। कंप्यूटर वही कार्य करता है जो यूजर द्वारा उसे निर्देश दिया जाता है कंप्यूटर में लिखे गए प्रोग्रामों को कंप्यूटर द्वारा समझी जाने वाली भाषा में लिखा जाता है।
एक या एक से अधिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यरत इकाइयों के समूह को एक “System” कहते हैं| जैसे – Hospital एक System है जिसकी इकाइयां (units) Doctor, Nurse, Medical, Treatment, Operation, Peasant आदि हैं | इसी प्रकार Computer भी एक System के रूप में कार्य करता है जिसके निम्नलिखित भाग हैं|
- Hardware
- Software
- User
Hardware
Computer के वे भाग जिन्हें हम छु सकते है देख सकते है Hardware कहलाते हैं| जैसे-Keyboard, Mouse, Printer, Scanner, Monitor, C.P.U. etc.
Software
Computer के वे भाग जिन्हें हम छु नहीं सकते सिर्फ देख सकते हैं सॉफ्टवेयर (Software) कहलाते हैं| जैसे- MS Word, MS Excel, MS PowerPoint, Photoshop, PageMaker etc.
User
वे व्यक्ति जो Computer को चलाते है Operate करते है और Result को प्राप्त करते
है, User कहलाते हैं|
सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)
- एक या एक से अधिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यरत इकाइयों
के समूह को “सिस्टम” कहा जाता हैं।
- कम्प्यूटर के वे भाग जिन्हें हम छू सकते हैं तथा देख सकते हैं
हार्डवेयर कहलाते हैं।
- कम्प्यूटर के वे भाग जिन्हें हम छू नहीं सकते हैं सिर्फ देख सकते हैं
सॉफ्टवेयर कहलाते हैं।
- वे व्यक्ति जो कम्प्यूटर को चलाते हैं और रिजल्ट को प्राप्त करते
हैं, यूजर कहलाते हैं।
- हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर एवं यूजर ये
तीनों ही कम्प्यूटर सिस्टम के मुख्य भाग होते हैं। Use
कंप्यूटर क्या हैं ? (What is Computer)
Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं, अर्थात् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं|
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Features / Characteristics of Computer (कंप्यूटर की विशेषताये)
Speed (गति)
आप पैदल चल कर कही भी जा सकते है फिर भी साईकिल, स्कूटर या कार का इस्तेमाल करते है ताकि आप किसी भी कार्य को तेजी से कर सके Machine की सहायता से आप कार्य की Speed बड़ा सकते है इसी प्रकार Computer किसी भी कार्य को बहुत तेजी से कर सकता है Computer कुछ ही Second में गुणा, भाग, जोड़, घटाना जैसी लाखो क्रियाएँ कर सकता है यदि आपको 500*44 का मान ज्ञात करना है तो आप 1 या 2 Minute लेगे यही कार्य कैलकुलेटर से करे तो वह लगभग 1 या 2 Second का समय लेगा पर कंप्यूटर ऐसी लाखों गणनाओ को कुछ ही सेकंड में कर सकता हैं|
Automation (स्वचालन) ko
हम अपने दैनिक जीवन में कई प्रकार की स्वचलित मशीनों का Use करते है Computer भी अपना पूरा कार्य स्वचलित (Automatic) तरीके से करता है कंप्यूटर अपना कार्य, प्रोग्राम के एक बार लोड हो जाने पर स्वत: करता रहता हैं|
Accuracy (शुद्धता)
Computer अपना सारा कार्य बिना किसी गलती के करता है यदि आपको 10 अलग-अलग संख्याओ का गुणा करने के लिए कहा जाए तो आप इसमें कई बार गलती करेगे | लेकिन साधारणत: Computer किसी भी Process को बिना किसी गलती के पूर्ण कर सकता है Computer द्वारा गलती किये जाने का सबसे बड़ा कारण गलत Data Input करना होता है क्योकि Computer स्वयं कभी कोई गलती नहीं करता हैं|
Versatility (सार्वभौमिकता)
Computer अपनी सार्वभौमिकता के कारण बढ़ी तेजी से सारी दुनिया में अपना प्रभुत्व जमा रहा है Computer गणितीय कार्यों को करने के साथ साथ व्यावसायिक कार्यों के लिए भी प्रयोग में लाया जाने लगा है| Computer का प्रयोग हर क्षेत्र में होने लगा है| जैसे- Bank, Railway, Airport, Business, School etc.
High Storage Capacity (उच्च संग्रहण क्षमता)
एक Computer System में Data Store करने की क्षमता बहुत अधिक होती है Computer लाखो शब्दों को बहुत कम जगह में Store करके रख सकता है यह सभी प्रकार के Data, Picture, Files, Program, Games and Sound को कई बर्षो तक Store करके रख सकता है तथा बाद में हम कभी भी किसी भी सूचना को कुछ ही Second में प्राप्त कर सकते है तथा अपने Use में ला सकते है|
Diligence (कर्मठता)
आज मानव किसी कार्य को निरंतर कुछ ही घंटो तक करने में थक जाता है इसके ठीक विपरीत Computer किसी कार्य को निरंतर कई घंटो, दिनों, महीनो तक करने की क्षमता रखता है इसके बावजूद उसके कार्य करने की क्षमता में न तो कोई कमी आती है और न ही कार्य के परिणाम की शुद्धता घटती हैं| Computer किसी भी दिए गए कार्य को बिना किसी भेदभाव के करता है चाहे वह कार्य रुचिकर हो या न हो |
Reliability (विश्वसनीयता)
Computer की Memory अधिक शक्तिशाली होती है Computer से जुडी हुई संपूर्ण प्रक्रिया विश्वसनीय होती है यह वर्षों तक कार्य करते हुए थकता नहीं है तथा Store Memory वर्षों बाद भी Accurate रहती हैं|
Power of Remembrance (याद रखने की क्षमता)
व्यक्ति अपने जीवन में बहुत सारी बाते करता है लेकिन महत्वपूर्ण बातों को ही याद रखता है लेकिन Computer सभी बाते चाहे वह महत्वपूर्ण हो या ना हो सभी को Memory के अंदर Store करके रखता है तथा बाद में किसी भी सूचना की आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कराता हैं|
सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)
- कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो यूजर द्वारा इनपुट किये गए डाटा में प्रक्रिया करके सूचनाओ को परिणाम के रूप में प्रदान करता हैं।
- कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं।
- कम्प्यूटर द्वारा गलती किये जाने का सबसे बड़ा कारण गलत डाटा इनपुट करना होता है।
- कम्प्यूटर गणितीय कार्यों को करने के साथ-साथ व्यावसायिक कार्यों के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता हैं।
- हम किसी कम्प्यूटर सिस्टम में डाटा को कई वर्षो तक स्टोर करके रख सकते हैं तथा बाद में कभी भी कुछ ही सेकेण्ड में उस सूचना को प्राप्त कर सकते हैं।
कंप्यूटर के भाग

Basic Components of A Computer System/ Block
Diagram
(कंप्यूटर के अवयव और ब्लाक डायग्राम)
1. Input Device
Input Device वे Device होते है जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को Computer में Input करा सकते हैं| Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मस्तिष्क को निर्देशित करती है की वह क्या करे? Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|
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· Basic Components of A Computer System/ Block Diagram (कंप्यूटर के अवयव और ब्लाक डायग्राम)
o (a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit)
o (c) C.U.
§
§ सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)
“Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|”
Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –
- Keyboard
- Mouse
- Joystick
- Trackball
- Light pen
- Touch screen
- Digital Camera
- Scanner
- Digitizer Tablet
- Bar Code Reader
- OMR
- OCR
- MICR
- ATM etc.
2. C.P.U.
C.P.U का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) हैं| इसका हिंदी नाम केन्द्रीय संसाधन इकाई होता हैं| यह Computer का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं| अर्थात इसके बिना Computer सिस्टम पूर्ण नहीं हो सकता है, इससे सभी Device जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor आदि | इसे Computer का मष्तिस्क (Mind) भी कहते है| इसका मुख्य कार्य प्रोग्राम (Programs) को क्रियान्वित (Execute) करना है इसके आलावा C.P.U Computer के सभी भागो, जैसे- Memory, Input, Output Devices के कार्यों को भी नियंत्रित करता हैं|
C.P.U (Central Processing Unit) के तीन भाग होते है –
- A.L.U.
- Memory
- C.U.
(a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit)
एरिथ्मेटिक एवं लॉजिक यूनिट को संक्षेप में A.L.U कहते हैं| यह यूनिट डाटा पर अंकगणितीय क्रियाएँ (जोड़, घटाना, गुणा, भाग) और तार्किक क्रियायें (Logical operation) करती हैं| A.L.U Control Unit से निर्देश लेता हैं| यह मेमोरी (memory) से डाटा को प्राप्त करता है तथा Processing के पश्चात सूचना को मेमोरी में लौटा देता हैं| A.L.U के कार्य करने की गति (Speed) अति तीव्र होती हैं| यह लगभग 1000000 गणनाये प्रति सेकंड (Per Second) की गति से करता हैं| इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ होता है जो बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाएँ करने में सक्षम होता हैं|
(b) Memory
यह Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार मेमोरी (Memory) हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है, यह एक संग्राहक उपकरण (Storage Device) हैं| अतः इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|
“Computer का वह स्थान जहाँ सभी सूचनाओ, आकडों या निर्देशों को Store करके रखा जाता है मेमोरी कहलाती हैं|”
(c) C.U.
C.U. का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (Control Unit) होता हैं| C.U. हार्डवेयर कि क्रियाओ को नियंत्रित और संचालित करता हैं| यह Input, Output क्रियाओ को नियंत्रित (Control) करता है साथ ही Memory और A.L.U. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को निर्देशित करता है यह प्रोग्राम (Program) को क्रियान्वित करने के लिये निर्देशों को मेमोरी से प्राप्त करता हैं| निर्देशों को विधुत संकेतों (Electric Signals) में परिवर्तित करके यह उचित डीवाइसेज तक पहुचता हैं|
3. Output Device
Output Device वे Device होते है जो User द्वारा इनपुट किये गए डाटा को Result के रूप में प्रदान करते हैं |
Output Device के द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त परिणामो (Result) को प्राप्त किया जाता है इन परिणामों को प्राय: डिस्प्ले डीवाइसेज (स्क्रीन) या प्रिंटर के द्वारा User को प्रस्तुत किया जाता हैं| मुख्य रूप से Output के रूप में प्राप्त सूचनाएं या तो हम स्क्रीन पार देख सकते है या प्रिंटर से पेज पर प्रिंट कर सकते है या संगीत सुनने के लिये आउटपुट के रूप में स्पीकर का उपयोग कर सकते हैं, Output Device कई प्रकार के होते है जैसे-
सरल शब्दों में सारांश (Summary Words)
- इनपुट डिवाइस वे डिवाइस हैं जो हमारे निर्देशों या आदेशों को कम्प्यूटर के मष्तिष्क तक पहुचाते हैं।
- इनपुट डिवाइस वे डिवाइस होते हैं जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को कम्प्यूटर में इनपुट करा सकते हैं।
- आउटपुट डिवाइस वे डिवाइस होते हैं जो यूजर द्वारा इनपुट किये गए डाटा को रिजल्ट के रूप में प्रदान करते हैं।
- सी.पी.यू का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट होता हैं।
- कम्प्यूटर का वह स्थान जहाँ सभी सूचनाओं, आकडों एवं निर्देशों को स्टोर करके रखा जाता हैं मेमोरी कहलाती हैं।
- ए.एल.यू. का पूरा नाम एरिथ्मेटिक लॉजिक यूनिट होता हैं।
- सी.यू. का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट होता हैं।
सेमीकंडक्टर मेमोरी क्या है?
सेमीकंडक्टर मेमोरी को समझने से पहले हम ये जानेंगे की मेमोरी क्या है?
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मेमोरी क्या है? (What is Memory?)यह Device Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (स्टोर) करके रखता है इसे Computer की याददाश्त भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार Computer में डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी (Memory) होती हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है,इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|
“किसी भी निर्देश, सूचना, अथवा परिणामों को स्टोर करके रखना मेमोरी कहलाता हैं|”
कंप्यूटरो में एक से अधिक मेमोरी होती है हम उनको सामान्यतः प्राथमिक (Primary) व द्वितीयक (Secondary) मेमोरी के रूप में वर्गीकृत कर सकते है प्राथमिक मेमोरी अस्थिर (Volatile) तथा स्थिर (Non-Volatile) दोनों प्रकार कि होती है| अस्थिर मेमोरी (Temporary Memory) डेटा को अस्थाई रूप से कंप्यूटर ऑन होने से लेकर कंप्यूटर बंद होने तक ही रखते है अर्थात कंप्यूटर अचानक बंद होने या बिजली के जाने पर कंप्यूटर से डाटा नष्ट हो जाता है स्थिर मेमोरी (Permanent Memory) आपके कंप्यूटर को प्रारंभ करने में सहायक होती हैं| इसमें कुछ अत्यंत उपयोगी फर्मवेयर होते है जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते है बूटिंग कंप्यूटर को शुरू करने कि प्रक्रिया को कहा जाता है इसे मुख्य मेमोरी कहा जाता हैं| द्वितीयक संग्रहण वह है जो हमारे डाटा को लंबे समय तक रखता है द्वितीयक संग्रहण कई रूपों में आते हैं| फ्लोपी डिस्क, हार्ड डिस्क, सी.डी. आदि |
बिट अथवा बाइट
मेमोरी में स्टोर किया गया डाटा 0 या 1 के रूप में परिवर्तित हो जाता है 0 तथा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी डिजिट कहा जाता हैं| संक्षेप में इन्हें बिट भी कहा जाता हैं| यह बिट कंप्यूटर कि मेमोरी में घेरे गे स्थान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं|
8
Bits = 1 Bytes
1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)
1024 KB = 1 Megabyte (1MB)
1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)
1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)
सेमीकंडक्टर मेमोरी क्या है? (What is Semiconductor Memory)
सेमीकंडक्टर मेमोरी एक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक डेटा स्टोरेज डिवाइस है जिसका उपयोग डिजिटल डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है, जैसे कंप्यूटर मेमोरी। यह आमतौर पर MOS मेमोरी को संदर्भित करता है, जहां डेटा को सिलिकॉन इंटीग्रेटेड सर्किट मेमोरी चिप पर मेटल-ऑक्साइड-सेमीकंडक्टर (MOS) मेमोरी सेल्स के भीतर स्टोर किया जाता है। इस मेमोरी को कई अलग-अलग प्रकार और टेक्नोलॉजी में बनाया गया है।
सेमीकंडक्टर मेमोरी में रैंडम एक्सेस की प्रॉपर्टी होती है, जिसका अर्थ है कि किसी भी मेमोरी लोकेशन तक पहुंचने में उतना ही समय लगता है, इसलिए किसी भी रैंडम क्रम में डेटा को कुशलता से एक्सेस किया जा सकता है। सेमीकंडक्टर मेमोरी में अन्य डेटा स्टोरेज की तुलना में बहुत तेज एक्सेस टाइम होता है; डेटा का एक बाइट कुछ नैनोसेकंड के भीतर सेमीकंडक्टर मेमोरी से लिखा या पढ़ा जा सकता है, जबकि हार्ड डिस्क जैसे घूर्णन स्टोरेज के लिए समय का उपयोग मिलीसेकंड की सीमा में है। इन कारणों से इसका उपयोग मुख्य कंप्यूटर मेमोरी के लिए किया जाता है, वर्तमान में डेटा को रखने के लिए कंप्यूटर अन्य उपयोगों के बीच काम कर रहा है। शिफ्ट रजिस्टर, प्रोसेसर रजिस्टर, डेटा बफ़र और अन्य छोटे डिजिटल रजिस्टर जिसमें मेमोरी मेमोरी डिकोडिंग मैकेनिज्म नहीं है, उन्हें मेमोरी के रूप में नहीं माना जाता है, हालांकि वे डिजिटल डेटा भी स्टोर करते हैं।
सेमीकंडक्टर मेमोरी के प्रकार (Types of Semiconductor Memory)
सेमीकंडक्टर मेमोरी दो प्रकार की होती हैं-
- RAM (Random Access Memory)
RAM या Random Access Memory कंप्यूटर की अस्थाई मेमोरी (Temporary Memory) होती हैं| की-बोर्ड या अन्य किसी इनपुट डिवाइस से इनपुट किया गया डाटा प्रक्रिया से पहले रैम में ही संगृहीत किया जाता है और सी.पी.यू. द्वारा आवश्यकतानुसार वहाँ से प्राप्त किया जाता है रैम में डाटा या प्रोग्राम अस्थाई रूप से संगृहीत रहता है कंप्यूटर बंद हो जाने या विजली चले जाने पर रैम में संगृहीत (स्टोर) डाटा मिट जाता हैं| इसलिए रैम को Volatile या अस्थाई मेमोरी कहते है रैम की क्षमता या आकार कई प्रकार के होते है जैसे कि- 4 MB, 8 MB, 16 MB, 32 MB, 64 MB, 128 MB, 256 MB आदि | रैम तीन प्रकार कि होती हैं| कंप्यूटर की रीड एंड राइट (R / W) मेमोरी को RAM कहा जाता है। उपयोगकर्ता इसे लिख सकता है और इससे जानकारी पढ़ सकता है।
- ROM (Read only memory)
ROM का पूरा नाम Read only Memory होता हैं| यह स्थाई मेमोरी (Permanent memory) होती है जिसमे कंप्यूटर के निर्माण के समय प्रोग्राम स्टोर कर दिये जाते हैं| इस मेमोरी में स्टोर प्रोग्राम परिवर्तित और नष्ट नहीं किये जा सकते है, उन्हें केवल पढ़ा जा सकता हैं| इसलिए यह मेमोरी रीड ऑनली मेमोरी कहलाती हैं| कंप्यूटर का स्विच ऑफ होने के बाद भी रोम में संग्रहित डाटा नष्ट नहीं होता हैं| अतः रोम नॉन-वोलेटाइल या स्थाई मेमोरी कहलाती है जिसे फर्मवेयर के रूप में भी जाना जाता है|
सेमीकंडक्टर मेमोरी तकनीक (Semiconductor memory technologies)
- PROM
PROM का पूरा नाम Programmable Read Only Memory होता है यह एक ऐसी मेमोरी है इसमें एक बार डाटा संग्रहित (Store) होने के बाद इन्हें मिटाया नहीं जा सकता और न ही परिवर्तन (Change) किया जा सकता हैं| इस वजह से, PROM चिप्स को अक्सर One Time Programmable (OTP) चिप्स के रूप में जाना जाता है। PROM में स्थायी रूप से स्टोर डाटा को मिटाने के लिए रॉम की प्रोग्रामिंग को कभी-कभी बर्निंग (Burning) के रूप में जाना जाता है और इसके लिए एक विशेष मशीन की आवश्यकता होती है जिसे ROM Burner कहा जाता है।
- EPROM ओ उई
EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory होता है यह प्रोम (PROM) की तरह ही होता है लेकिन इसमें संग्रहित प्रोग्राम (Store Program) को पराबैगनी किरणों (Ultraviolet rays) के द्वारा ही मिटाया जा सकता है और नए प्रोग्राम संग्रहित (Store) किये जा सकते हैं| इसे आसानी से EPROM Eraser एक उपकरण की सहायता से, जिसमें Ultraviolet rays स्रोत होता है जो चिप को एक रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण डाटा को मिटा देता है।
- EEPROM
EEPROM का पूरा नाम Electrical Programmable Read Only Memory होता हैं| एक नई तकनीक इ-इप्रोम (EEPROM) भी है जिसमे मेमोरी से प्रोग्राम को विधुतीय विधि से मिटाया जा सकता हैं| इसे हाइब्रिड मेमोरी भी कहा जाता है क्योंकि यह रैम के समान पढ़ता है और लिखता है, लेकिन रॉम के समान डेटा रखता है। यह रैम और रोम का एक मिश्रण है।
- Dynamic RAM
Dynamic RAM को संक्षिप्त में डीरैम (DRAM) कहा जाता हैं| रैम (RAM) में सबसे अधिक साधारण डीरैम (DRAM) है यह प्रत्येक बिट को स्टोर करने के लिए एक MOSFET (MOS field-effect transistor) और एक MOS कैपेसिटर से युक्त मेटल-ऑक्साइड-सेमीकंडक्टर (MOS) मेमोरी सेल्स का उपयोग करता है। इस प्रकार की रैम घनत्व में सबसे सस्ती और उच्चतम है, इसलिए इसका उपयोग कंप्यूटर में मुख्य मेमोरी के लिए किया जाता है।
मेमोरी सेल में डेटा को स्टोर करने वाला इलेक्ट्रिक चार्ज धीरे-धीरे लीक हो जाता है, इसलिए मेमोरी सेल्स को समय-समय पर रिफ्रेश (फिर से लिखना) करना चाहिए, जिसमें अतिरिक्त सर्किट्री की आवश्यकता होती है। रिफ्रेश प्रक्रिया कंप्यूटर द्वारा आंतरिक रूप से नियंत्रित की जाती है और अपने उपयोगकर्ता के लिए पारदर्शी होती है। इसे जल्दी जल्दी रिफ्रेश (Refresh) करने कि आवश्यकता पड़ती हैं| रिफ्रेश का अर्थ यहाँ पर चिप को विधुत अवशेषी करना होता है यह एक सेकंड में लगभग हजारों बार रिफ्रेश होता है तथा प्रत्येक बार रिफ्रेश होने के कारण यह पहले कि विषय वस्तु को मिटा देती है इसके जल्दी जल्दी रिफ्रेश होने के कारण इसकी गति (Speed) कम होती हैं|
- SRAM
Static RAM ऐसी रैम है जो कम रिफ्रेश होती हैं| कम रिफ्रेश (Refresh) होने के कारण यह डाटा को मेमोरी में अधिक समय तक रखता हैं| डीरैम की अपेक्षा एस-रैम तेज तथा महँगी होती हैं| यह कई MOSFETs पर निर्भर करता है जो प्रत्येक बिट को स्टोर करने के लिए एक डिजिटल फ्लिप-फ्लॉप बनाता है। यह डीआरएएम की तुलना में कम घना और प्रति बिट अधिक महंगा है, लेकिन तेजी से और मेमोरी रिफ्रेश की आवश्यकता नहीं है। इसका उपयोग कंप्यूटर में छोटी कैश मेमोरी के लिए किया जाता है।
- Synchronous RAM
Synchronous RAM डीरैम (DRAM) कि अपेक्षा ज्यादा तेज हैं| इसकी तेज गति का कारण यह है कि यह सी.पी.यू. की घडी कि गति के अनुसार Refresh होती हैं| इसीलिए ये डीरैम कि अपेक्षा डाटा (Data) को तेजी से स्थानांतरित (Transfer) करता हैं|
कंप्यूटर मेमोरी क्या हैं और उसके प्रकार
What is Memory (मेमोरी क्या हैं?)
यह Device Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश्त भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार Computer में डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी (Memory) होती हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है,इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|
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“किसी भी निर्देश, सूचना, अथवा परिणामों को स्टोर करके रखना मेमोरी कहलाता हैं|”कंप्यूटरो में एक से अधिक मेमोरी होती है हम उनको सामान्यतः प्राथमिक (Primary) व द्वितीयक (Secondary) मेमोरी के रूप में वर्गीकृत कर सकते है प्राथमिक मेमोरी अस्थिर (Volatile) तथा स्थिर (Non-Volatile) दोनों प्रकार कि होती है| अस्थिर मेमोरी (Temprery Memory) डेटा को अस्थाई रूप से कंप्यूटर ऑन होने से लेकर कंप्यूटर बंद होने तक ही रखते है अर्थात कंप्यूटर अचानक बंद होने या बिजली के जाने पर कंप्यूटर से डाटा नष्ट हो जाता है स्थिर मेमोरी (Permanent Memory) आपके कंप्यूटर को प्रारंभ करने में सहायक होती हैं| इसमें कुछ अत्यंत उपयोगी फर्मवेयर होते है जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते है बूटिंग कंप्यूटर को शुरू करने कि प्रक्रिया को कहा जाता है इसे मुख्य मेमोरी कहा जाता हैं| द्वितीयक संग्रहण वह है जो हमारे डाटा को लंबे समय तक रखता है द्वितीयक संग्रहण कई रूपों में आते हैं| फ्लोपी डिस्क, हार्ड डिस्क, सी.डी. आदि |
बिट अथवा बाइट
मेमोरी में स्टोर किया गया डाटा 0 या 1 के रूप में परिवर्तित हो जाता है 0 तथा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी डिजिट कहा जाता हैं| संक्षेप में इन्हें बिट भी कहा जाता हैं| यह बिट कंप्यूटर कि मेमोरी में घेरे गे स्थान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं|
8 Bits = 1 Bytes
1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)
1024 KB = 1 Megabyte (1MB)
1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)
1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)
मेमोरी के प्रकार (Types of Memory)
- प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
- सेकंडरी मेमोरी (Secondary Memory)
प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
Memory कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जहाँ डाटा, सूचना, एवं प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहते है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है यह मेमोरी अस्थिर मेमोरी होती है क्योकि इसमें लिखा हुआ डाटा कंप्यूटर बंद होने या बिजली के जाने पर मिट जाता है प्राइमरी मेमोरी कहलाती हैं| इसे प्राथमिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं|
प्राइमरी मेमोरी मुख्यतः दो प्रकार की होती है –
कंप्यूटर की पीढियां
Generations of Computer (कंप्यूटर की पीढियां)
सन् 1946 में प्रथम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) युक्त एनिएक कम्प्यूटर की शुरूआत ने कम्प्यूटर के विकास को एक आधार प्रदान किया कम्प्यूटर के विकास के इस क्रम में कई महत्वपूर्ण डिवाइसेज की सहायता से कम्प्यूटर ने आज तक की यात्रा तय की। इस विकास के क्रम को हम कम्प्यूटर में हुए मुख्य परिवर्तन के आधार पर निम्नलिखित पॉंच पीढि़यों में बॉंटते हैं:-
Table of Contents
कम्प्यूटरों की प्रथम पीढ़ी (First Generation Of Computer) :- 1946-1956
कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी की शुरुआत सन् 1946 में एकर्ट और मुचली के एनिएक (ENIAC-Electronic Numerical Integrator And Computer) नामक कम्प्यूटर के निर्माण से हुआ था इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था जिसका आविष्कार सन् 1904 John Ambrose Fleming ने किया था इस पीढ़ी में एनिएक के अलावा और भी कई अन्य कम्प्यूटरों का निर्माण हुआ जिनके नाम एडसैक (EDSEC – Electronic Delay Storage Automatic Calculator), एडवैक (EDVAC – Electronic Discrete Variable Automatic Computer ), यूनिवैक (UNIVAC – Universal Automatic Computer), एवं यूनीवैक – 1 (UNIVAC – 1) हैं।
प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते थे इनकी Speed बहुत ही Slow होती थी और मेमोरी भी कम होती थी इसी कारण इन कंप्यूटर में डाटा को स्टोर करके नहीं रखा जा सकता था इन कंप्यूटर की कीमत बहुत अधिक होने के कारण ये कंप्यूटर आम जनता की पहुँच से दूर थे|
प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित लक्षण थे:-
- वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग
- पंचकार्ड पर आधारित
- संग्रहण के लिए मैग्नेटिक ड्रम का प्रयोग
- बहुत ही नाजुक और कम विश्वसनीय
- बहुत सारे एयर – कंडीशनरों का प्रयोग
- मशीनी तथा असेम्बली भाषाओं में प्रोग्रामिंग
कम्प्यूटरों की द्वितीय पीढ़ी (Second Generation Of Computers) :- 1956-1964
कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी के बाद सन् 1956 में कंप्यूटर की द्वितीय पीढ़ी की शुरूआत हुई इन कम्प्यूटरों में Vacuum tube (वैक्यूम ट्यूब) के स्थान पर Transistor (ट्रॉजिस्टर) का उपयोग किया जाने लगा| विलियम शॉकले (William Shockley) ने ट्रॉंजिस्टर का आविष्कार सन् 1947 में किया था जिसका उपयोग द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर किया जाने लगा। ट्रॉंजिस्टर के उपयोग ने कम्प्यूटरों को वैक्यूम ट्यूबों के अपेक्षाकृत अधिक गति एवं विश्वसनीयता प्रदान की| Transistor (ट्रॉजिस्टर) के आने के बाद कंप्यूटर के आकार में भी सुधार आया द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर से आकार में छोटे हो गए|
द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण थे:-
- वैक्यूम ट्यूब के बदले ट्रॉजिस्टर का उपयोग
- अपेक्षाकृत छोटे एवं ऊर्जा की कम खपत
- अधिक तेज एवं विश्वसनीय
- प्रथम पीढ़ी की अपेक्षा कम खर्चीले
- COBOL एवं FORTRAN जैसी उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास
- संग्रहण डिवाइस, प्रिंटर एवं ऑपरेटिंग सिस्टम आदि का प्रयोग
कम्प्यूटरों की तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer) :- 1965-1971
कम्प्यूटरों की तृतीय पीढ़ी की शुरूआत 1964 में हुई। इस पीढ़ी ने कम्प्यूटरों को IC (आई.सी.) प्रदान किया। आई.सी. अर्थात् एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit) का आविष्कार टेक्सास इन्स्ट्रमेंन्ट कम्पनी (Texas Instrument Company) के एक अभियंता जैक किल्बी (Jack Kilby) ने किया था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में ICL 2903, ICL 1900, UNIVAC 1108 और System 1360 प्रमुख थे।
तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण थे:-
- एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit) का प्रयोग
- प्रथम एवं द्वितीय पीढि़यों की अपेक्षा आकार एवं वजन बहुत कम
- अधिक विश्वसनीय
- पोर्टेबल एवं आसान रख-रखाव
- उच्चस्तरीय भाषाओं का बृहद् स्तर पर प्रयोग
कम्प्यूटरों की चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation Of Computers) :- 1971-1985
कंप्यूटर की चतुर्थ पीढ़ी की शुरुआत सन् 1971 से हुई | सन् 1971 से लेकर 1985 तक के कम्प्यूटरों को चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटरों की श्रेणी में रखा गया है। इस पीढ़ी में IC (Integrated Circuit) को और अधिक विकसित किया गया जिसे विशाल एकीकृत सर्किट (Large Integrated Circuit) कहा जाता हैं। एक Integrated Circuit लगभग 300000 ट्रांजिस्टरों के बराबर कार्य कर सकता हैं। इस आविष्कार से पूरी सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट एक छोटी – सी चिप में आ गयी जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहा जाता हैं। इसके उपयोग वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर कहा गया।
ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कम्प्यूटर था जिसे मिट्स (MITS) नामक कम्पनी ने बनाया था। इसी कम्प्यूटर पर बिल गेटस (Bill gates), जो उस समय हावर्ड विश्वविद्यालय के छात्र थे, ने बेसिक भाषा को स्थापित किया था। इस सफल प्रयास के बाद गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी की स्थापना की जो दुनिया में सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी कम्पनी हैं। इस कारण, बिल गेट्स को दुनिया-भर के कम्प्यूटरों का स्वामी (Owner Of Computers) कहा जाता हैं।
चतुर्थ पीढ़ी के आने से कंप्यूटर के युग में एक नई क्रान्ति आई | इन कंप्यूटर का आकार बहुत ही छोटा हो गया और मेमोरी बहुत अधिक बढ़ गई आकार छोटा होने से इन कंप्यूटर का रख रखाव बहुत आसान हो गया इसी के साथ इनकी कीमत इतनी कम हो गई की आम जनता इन कंप्यूटर को आसानी से खरीद सकती थी |
इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण हैं-
- अतिविशाल स्तरीय एकीकरंण (Very Large Scale Integration) तकनीक का उपयोग।
- आकार में अद् भुत कमी।
- साधारण आदमी की क्रय-क्षमता के अंदर।
- अधिक प्रभावशाली, विश्वसनीय एवं अद् भुत गतिमान।
- अधिक मेमोरी क्षमता।
- कम्प्यूटरों के विभिन्न नेटवर्क का विकास।
कम्प्यूटरों की पंचम पीढ़ी (Fifth Generation of Computer) :- 1985 – अब तक
कंप्यूटर की पांचवी पीढ़ी की शुरुआत 1985 से हुई | 1985 से अब तक के कंप्यूटर पांचवी पीढ़ी के अंतर्गत आते हैं कंप्म्प्यूटरों की पॉंचवीं पीढ़ी में वर्तमान के शक्तिशाली एवं उच्च तकनीक वाले कम्प्यूटर से लेकर भविष्य में आने वाले कम्प्यूटरों तक को शामिल किया गया हैं। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में कम्प्यूटर वैज्ञानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को समाहित करने के लिए प्रयासरत हैं। आज के कम्प्यूटर इतने उन्नत हैं कि वे हर विशिष्ट क्षेत्र, मूल रूप से अकाउन्टिंग, इंजिनियरिंग, भवन-निर्माण, अंतरिक्ष तथा दूसरे प्रकार के शोध-कार्य में उपयोग किये जा रहे हैं।
इस पीढ़ी के प्रारम्भ में, कम्प्यूटरों का परस्पर संयोजित किया गया ताकि डेटा तथा सूचना की आपस में साझेदारी तथा आदान-प्रदान हो सकें। नये इंटिग्रेटेड सर्किट (Ultra Large Scale Integrated Circuit), वेरी लार्ज स्केल इंटिग्रेटिड सर्किट (Very Large Scale Integrated Circuit) को प्रतिस्थापित करना शुरू किया। इस पीढ़ी में प्रतिदिन कम्प्यूटर के आकार को घटाने का प्रयास किया जा रहा हैं जिसके फलस्वरूप हम घड़ी के आकार में भी कम्प्यूटर को देख सकते हैं। पोर्टेबल (Portable) कम्प्यूटर तथा इण्टरनेट की सहायता से हम दस्तावेज, सूचना तथा पैसे का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
पॉंचवी पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं-
- कम्प्यूटरों के विभिन्न आकार (Different Size of Computer): आवश्यकतानुसार कम्प्यूटर के आकार और संरचना को तैयार किया जाता हैं। आज विभिन्न मॉडलों-डेस्क टॉप (Desk Top), लैप टॉप (Lap Top), पाम टॉप (Palm Top), आदि में कम्प्यूटर उपलब्ध हैं।
- इण्टरनेट (Internet):- यह कम्प्यूटर का एक अंतर्राष्ट्रीय संजाल हैं। दुनिया-भर के कम्प्यूटर नेटवर्क इण्टरनेट से जुड़े होते हैं। और इस तरह हम कहीं से भी, घर बैठे – अपने स्वास्थ्य, चिकित्सा, विज्ञान कला एवं संस्कृति आदि-लगभग सभी विषयों पर विविध सामग्री इण्टरनेट पर प्राप्त कर सकते हैं।
- मल्टीमीडिया (Multimedia):- घ्वनी (Sound), दृश्य (Graphics), या चित्र और पाठ (Text), के सम्मिलित रूप से मल्टीमीडिया का इस पीढ़ी में विकास हुआ हैं।
- नये अनुप्रयोग (New Applications):- कम्प्यूटर की तकनीक अतिविकसित होने के कारण इसके अनुप्रयोगों यथा फिल्म-निर्माण, यातायात-नियन्त्रण, उघोग, व्यापार एवं शोध आदि के क्षेत्र में।
कंप्यूटर के प्रकार | Types Of Computer Hindi
Types of Computer (कंप्यूटर के प्रकार) – कम्प्यूटर को उसके साइज – आकर, कार्य-क्षमता तथा उद्देश्य के आधार पर विभिन्न प्रकार में वर्गीकृत किया गया है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको Computer ke prakar के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है.
Table of Contents
Computer को तीन आधारों पर वर्गीकृत किया गया हैं- कार्यप्रणाली के आधार पर (Based on Mechanism)
- उद्देश्य के आधार पर (Based on Purpose)
- आकार के आधार पर (Based on Size)
कार्यप्रणाली के आधार पर (Based on Mechanism)
कार्यप्रणाली के आधार पर इन्हें तीन भागो Analog, Digital, and Hybrid में वर्गीकृत किया गया हैं|
Analog Computer
Analog Computer वे Computer होते है जो भौतिक मात्राओ, जैसे- दाब (Pressure), तापमान (Tempressure), लम्बाई (Length), ऊचाई (Height) आदि को मापकर उनके परिमाप अंको में व्यक्त करते है ये Computer किसी राशि का परिमाप तुलना के आधार पर करते है जैसे- थर्मामीटर |
Analog Computer मुख्य रूप से विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रयोग किये जाते है क्योकि इन क्षेत्रो में मात्राओ का अधिक उपयोग होता हैं| उदाहरणार्थ, एक पट्रोल पम्प में लगा Analog Computer, पम्प से निकले पट्रोल कि मात्रा को मापता है और लीटर में दिखाता है तथा उसके मूल्य कि गणना करके Screen पर दिखाता हैं|
Digital Computer
Digit का अर्थ होता है अंक | अर्थात Digital Computer वह Computer होता है जो अंको कि गणना करता है Digital Computer वे Computer है जो व्यापार को चलाते है, घर का वजट तैयार करते है औ प्रकार के Computer किसी भी चीज कि गणना करके “How Many” (मात्रा में कितना) के आधार पर प्रश्न का उत्तर देता हैं|
Hybrid Computer
Hybrid Computer का अर्थ है अनेक गुण धर्मो वाला होना | अत: वे Computer जिनमे Analog Computer or Digital Computer दोनों के गुण हो Hybrid Computer कहलाते है जैसे- पेट्रोल पम्प की मशीन भी एक Hybrid Computer हैं|
उद्देश्य के आधार पर (Based on Purpose)
Computer को उद्देश्य के आधार पर दो भागो में Special Purpose और General Purpose के आधार पर वर्गीकृत किया गया हैं|
Special Purpose
Special Purpose Computer ऐसे Computer है जिन्हें किसी विशेष कार्य के लिये तैयार किया जाता है इनके C.P.U. की क्षमता उस कार्य के अनुरूप होती है जिसके लिये इन्हें तैयार किया जाता हैं| जैसे- अन्तरिक्ष विज्ञान, मौसम विज्ञान, उपग्रह संचालन, अनुसंधान एवं शोध, यातायात नियंत्रण, कृषि विज्ञान, चिकित्सा आदि |
General Purpose
General Purpose Computer ऐसे Computer है जिन्हें सामान्य उद्देश्य के लिये तैयार किया गया है इन Computer में अनेक प्रकार के कार्य करने कि क्षमता होती है इनमे उपस्थित C.P.U. की क्षमता तथा कीमत कम होती हैं| इन Computers का प्रयोग सामान्य कार्य हेतु जैसे- पत्र (Letter) तैयार करना, दस्तावेज (Document) तैयार करना, Document को प्रिंट करना आदि के लिए किया जाता हैं|
आकार के आधार पर (Based on Size)
Computer को आकार के आधार पर हम निम्न श्रेणियों में बाँट सकते है –
1. Super Computer
ये सबसे अधिक गति वाले Computer व अधिक क्षमता वाले Computer हैं| इनमे एक से अधिक C.P.U. लगाये जा सकते है व एक से अधिक व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते हैं| ये Computer सबसे महँगे होते है व आकार में बहुत बड़े होते हैं|
2. Mini Computer
Micro Computer से कुछ अधिक गति व मेमोरी वाले Computer Mini Computer कहलाते है इनमे एक से अधिक C.P.U. हो सकते है व ये Micro Computer से महँगे होते हैं|मिनी Computer का उपयोग यातायात में यात्रियों के लिये आरक्षण-प्रणाली का संचालन और बैंको के बैंकिंग कार्यों के लिये होता हैं|
Main Frame Computer
Main Frame Computer, Mini Computer से कुछ अधिक गति व क्षमता वाले Computer Main Frame Computer कहलाते हैं|ये Computer आकार में बहुत बड़े होते है इनमे अत्यधिक मात्रा के Data पर तीव्रता से Process करने कि क्षमता होती है इसीलिए इनका उपयोग बड़ी कंपनियों, बैंको, रेल्वे आरक्षण, सरकारी विभाग द्वारा किया जाता हैं|
Micro Computer
इस Computer को Micro Computer दो कारणों से कहा जाता है पहला इस Computer में Micro Processor का प्रयोग किया जाता है दूसरा यह Computer दूसरे Computer कि अपेक्षा आकार में छोटा होता है Micro Computer आकार में इतना छोटा होता है कि इसको एक Study Table अथवा एक Briefcase में रखा जाता सकता हैं| यह Computer सामान्यतःसभी प्रकार के कार्य कर सकता है इसकी कार्य प्रणाली तो लगभग बड़े कंप्यूटर्स के सामान ही होती है परन्तु इसका आकार उनकी तुलना में कम होता हैं| इस Computer पर सामान्यतः एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता हैं|
Desktop Computer
Desktop Computer एक ऐसा Computer है जिसे Desk पर सेट किया जाता है इसमें एक C.P.U., मोनिटर (Monitor), कि-बोर्ड (keyboard), तथा माउस (Mouse) होते हैं| इन्हें हम अलग अलग देख सकते हैं| Desktop Computer की कीमत कम होती है परन्तु इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल होता हैं|
सरल शब्दों में सारांश
- Analog Computer वे Computer होते है जो भौतिक मात्राओ, जैसे- दाब (Pressure), तापमान (Tempressure), लम्बाई (Length), ऊचाई (Height) आदि को मापकर उनके परिमाप अंको में व्यक्त करते है|
- Digital Computer वह Computer होता है जो अंको कि गणना करता है|
- Hybrid Computer का अर्थ है अनेक गुण धर्मो वाला होना | अत: वे Computer जिनमे Analog Computer or Digital Computer दोनों के गुण हो Hybrid Computer कहलाते है
- Special Purpose Computer ऐसे Computer है जिन्हें किसी विशेष कार्य के लिये तैयार किया जाता है|
- Desktop Computer एक ऐसा Computer है जिसे Desk पर सेट किया जाता है इसमें एक C.P.U., मोनिटर (Monitor), कि-बोर्ड (keyboard), तथा माउस (Mouse) होते हैं
निष्कर्ष – कंप्यूटर के प्रकार हिंदी में
मुझे उम्मीद है की आपको यह आर्टिकल कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computer in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. अगर आपको इस article से लेकर कोई भी सवाल हो तो इसके लिए आप निचे comment कर सकते है। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ social media जैसे Facebook, Twitter पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।
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